कालेधन के खिलाफ मोदी की नोटबंदी मुहिम भले ही देशहित के लिए बड़ा फैसला है, लेकिन यह मुहिम आम लोगों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। इसकी एक बानगी बलिया जिले में देखने को मिल रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान बैंकों का चक्कर काटने के बाद भी पैसा नहीं मिलने से दो मौतें हो चुकी हैं।
पिछले सप्ताह बेटी के तिलक के लिए बैंक से नोट नहीं बदले जाने के कारण परेशान चल रहे पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई, वहीं आज मंगलवार को इलाज के लिए बैंक में जमा पैसा नहीं मिल पाने के कारण एक युवक की जान चली गई। बीते दिनों सहतवार के वार्ड नं एक निवासी सुरेश सोनार पुत्र हीरालाल सोनार की लड़की सुमन की शादी होनी थी।
इसके लिए पैसों की जरूरत थी। उन्होंने अपना ही पैसा निकालने के लिए कई दिनों तक स्टेट बैंक का चक्कर काटे लेकिन उनको समय से पैसा नहींमिला। इसी चिंता में उनको हार्ट अटैक आया और उनकी मृत्यु हो गई। और आज तो हद हो गया अब अपना पैसा रहने के बावजूद कोई इस देश में इलाज के अभाव कैसे मर सकता है। लेकिन ऐसा ही घटना क्रम बैरिया थ्राना क्षेत्र के मानगढ़ निवासी संजय गोंड घर पर ही रहकर खेतीबारी का काम करता था।
मां विद्यावती, पत्नी सुनीता तथा चार साल की बच्ची सोनी की जिम्मेदारी उसके उपर थी। इधर दस दिन पूर्व उसके पेट में अचानक दर्द शुरू हुआ। जिला अस्पताल में अल्ट्रा साउंड कराने के बाद पता चला कि किडनी में पथरी हो गई है। हालत नाजुक देख चिकित्सकों ने वाराणसी के लिए रेफर कर दिया, जहां आपरेशन के लिए 20 हजार रुपये मांगा गया।
मां विद्यावती अपने अकाउंट से पैसा निकालने के लिए रोज बैंक में जाती थी। लेकिन बैंक में नकदी की किल्लत होने के कारण हर रोज उसे बैरंग होकर वापस जाना पड़ता था। उधर संजय की हालत तिल-तिल बिगड़ रही थी। अंतत: सोमवार की शाम संजय ने वाराणसी अस्पताल में अंतिम सांस ली। इस दोनों घटनाक्रम ने पूरे जनपदवासी को झकझोर कर रख दिया है।