कारागार मुख्य प्राचीर के अभाव में सुरक्षा के दृष्टिकोण से सुरक्षित नहीं है। हालांकि कारागार प्रशासन द्वारा सुरक्षा के मद्देनजर चाक चौबंद व्यवस्था की जाती है। बावजूद कारागार के पीछे से अराजकतत्व कुछ निषेध वस्तुएं बैरक में फेंकने में सफल हो जाते हैं। इसके अलावा मानक से दो गुना कारागार में कैदी निरूद्ध है। कैदियों के पानी पीने के लिए आर ओ प्लांट सांसद द्वारा लगाया गया है। लेकिन कैदियों की संख्या को देखते हुए अभी एक आरओ प्लांट की आवश्यकता है।
जिला कारागार में निरूद्ध कैदियों को भोजन से लेकर अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध है। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त मात्रा में फोर्स भी उपलब्ध हो गई है। कारागार की क्षमता 339 की है। जबकि वर्तमान में 700 कैदी मौजूद हे। इस प्रकार मानक से दो गुना कैदी कारागार में निरूद्ध है। इसके अलावा काराबार की मुख्य प्राचीर भी नहीं है। इसके साथ ही कारागार के पूरब, पश्चिम व उत्तर दिशा में घनी आबादी हो गई है। इस दृष्टिकोण से भी कारागार असुरक्षित है।
कारागार को दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है। कैदियों के लिए सबसे बड़ी समस्या पीने वाले पानी की थी। जिसे सांसद भरत सिंह ने आरो प्लांट लगवाकर निदान कर दिया। बावजूद अभी एक और आरोप प्लांट की आवश्यकता है। वहीं शौचालय व स्नान घर निरूद्ध कैदियों के हिसाब से काफी कम है। इस बाबत जेल अधीक्षक/जेलर एके मिश्रा ने बताया कि कैदियों को सभी मूलभूत सुविधाएं दी जाती है। पानी की समस्या थी, जिसे सांसद भरत सिंह ने कारागार में आर ओ प्लांट लगवा कर दूर किया। लेकिन अभी एक और आरो प्लांट की आवश्यकता है।