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एक साल भी पूरा नहीं, फटने लगे जिओ बैग, उड़ने लगे बालू

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जयप्रकाशनगर क्षेत्र के सिताबदियारा के भवन टोला गांव के समीप बाढ़ विभाग द्वारा एक वर्ष पूर्व निर? - फोटो : BALLIA
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बलिया। लाख प्रयास के बावजूद बाढ़ और कटान के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग और बंदरबांट पर लगाम नहीं पा रहा है। भवन टोला गांव के समीप बने रिंग बांध में लगा जिओ बैग अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं कर पाया और ऊपर से बैग फटना शरू हो गया है और उसमें भरा बालू हवा के झोंको में उड़ना शुरू हो चुका है। इसके बावजूद विभाग सो रहा है। जिले के पूर्वी छोर पर स्थित समाजवाद के पुरोधा रहे जयप्रकाश नारायन के पैतृक गांव सिताबदियारा गंगा व घाघरा नदी के बाढ़ के पानी से वर्षों से तबाह होता चला आ रहा है। इसे बाढ़ से बचाने के लिए रिंग बांध बनाने का प्रयास यूपी और बिहार राज्य के जनप्रतिनिधियों द्वारा बहुत दिनों तक करने के बाद वर्ष 2017 में सहमति बनी और रिंग बांध बनाने की स्वीकृति सरकार द्वारा मिली। उसी समय इसका निर्माण कार्य भी शुरू हो गया। बिहार सरकार द्वारा अपने क्षेत्र में करीब 85 करोड़ की लागत से लगातार कार्य करवाकर रिंग बांध का निर्माण कार्य वर्ष 2018 में ही पूरा कर लिया गया लेकिन वहीं यूपी की सीमा में 40.4976 करोड़ की लागत से निर्माण होने वाला रिंग बांध पर मात्र दो करोड़ रुपये वर्ष 2019 में खर्च कर रिंग बांध का निर्माण कार्य करवाकर अधूरा ही छोड़ दिया गया था। दुबारा बांध का निर्माण कार्य शुरू होते ही बाढ़ विभाग और कार्यदायी संस्था की मिलीभगत से धन का बंदरबांट भी शुरू कर दिया गया। बतौर उदाहरण भवन टोला गांव के समीप बने रिंग बांध में लगा जिओ बैग अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं कर पाया और फटना शुरू हो गया है। इसके चलते, उसमें भरा बालू हवा के झोंकों से उड़ने लगा है। वहीं, आसपास करीब पांच वर्ष पूर्व से लगे जिओ बैग ज्यों का त्यों हैं। इसके भरोसे आखिर कब तक यह बांध इस सिताबदियारा को सुरक्षित कर पाएगा यह कहना मुश्किल है। हालांकि बाढ़ खंड के एसडीओ कमलेश कुमार का दावा है कि रिंग बांध निर्माण में जो भी जिओ बैग लगाए गए हैं, वह मानक के अनुरूप ही हैं लेकिन फटने की जानकारी उन्हें नहीं है।
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यह कार्य मेरे कार्यकाल में नहीं हुए हैं। फिर भी इसकी जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - संजय कुमार मिश्र, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड, बलिया
10 करोड़ खर्च फिर भी न एनएच 31 सुरक्षित, न गांव
रामगढ़। सरकारी धन का बंदरबांट कैसे किया जाता है, अगर इसकी सच्चाई देखनी है तो गंगा उस पार पचरुखिया नारायणपुर मौजा में बैराज खंड के अधिकारियों द्वारा कराए गए ड्रेजिंग कार्य को देखा जा सकता है। विभागीय शिथिलता के कारण कैसे 10 करोड़ रुपये रेत में शिल्ट हो गया। अब बैराज खंड नया पैंतरा शुरू करते हुए पूर्व के कराए गए कार्यों से एक किमी उत्तर से शेष बचे 20 करोड़ रुपये की लागत से नदी की धारा को मोड़ने के लिए ड्रेजिंग शुरू कर दिया है।
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10 करोड़ रुपये की लागत से करीब तीन किमी की दूरी तक पिछले साल एक सहायक नदी बनाई गई लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण गंगा में हल्की सी उफान आई थी कि यह सहायक नदी करीब 600 मीटर की दूरी तक बालू की ढेर से तब्दील होकर ब्लॉक हो गई और विभाग चुपचाप तमाशा देखता रहा। इसकी सच्चाई ग्रामीणों को तो दिख ही रही थी कि बैराज खंड की यह योजना धरातल पर अभी मूर्त रूप लेती नहीं दिख रही है। नए जिलाधिकारी ने गंगापुर पर सुनार टोला रामगढ़ में चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया और ड्रेजिंग के कार्य को देखने के लिए अधिकारियों को सचेत रहने के लिए कहा है। इसके बाद से बैराज खंड के अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं और आनन-फानन में शेष बचे 20 करोड़ रुपये की लागत से पूर्व में कराए गए कार्य से करीब एक किलोमीटर पीछे पुन: नदी की धारा को 10 किलोमीटर की दूरी तक खोदने का कार्य शुरू हो गया है। देखना है कि बैराज खंड की यह कवायद कितनी कारगर होती है।
10 किलोमीटर की दूरी तक ड्रेजिंग का कार्य करना है। इसमें नदी के तल से चार मीटर नीचे तक ड्रेजिंग किया जाएगा। नदी की चौड़ाई 60 मीटर होगी। मुझे पूर्व में कराए गए कार्य के बाबत अभी कोई जानकारी नहीं है। - दिलीप कुमार, सहायक अभियंता, बैराज खंड
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