बैरिया। गंगा पार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर प्रशासन की नजर नहीं है। इसकी वजह है वहां नाव आदि की व्यवस्था नहीं की गई है। इसकी वजह से बाढ़ से घिरे भुवालछपरा नौरंगा की प्रसूता विमला देवी पत्नी जितेंद्र गोड़ (30) बुधवार देर शाम प्रसव पीड़ा से कराहती रही लेकिन उसे अस्पताल ले जाने के लिए न तो नाव मिली और न गांव में एएनएम आई। परिणाम स्वरूप उसने देर रात मृत नवजात को जन्म दिया।
जिला प्रशासन की नजर दुबे छपरा में एनएच 31 पर शरण लेने वाली बाढ़ पीड़ितों पर है लेकिन गंगा पार नौरंगा के बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने अब तक कोई नहीं पहुंचा। गांव के प्रधान प्रतिनिधि सुरेंद्र ठाकुर, पूर्व प्रधान राजमंगल ठाकुर, धनु ठाकुर ने 10 दिन पूर्व से ही शासन प्रशासन को पत्र देकर अवगत कराया था कि कटान से गांव का अस्तित्व पर संकट है। सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि व फसल नदी में विलीन हो गई है। 50 से अधिक लोग गांव छोड़कर बिहार में सड़कों के किनारे शरण लिए हुए हैं। नौरंगा, भुवालछपरा, चक्की नौरंगा के वाशिन्दों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। 20 हजार की अबादी घरों में कैद है। ऐसे में राहत सामग्री तो दूर की बात है वहां बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। नौरंगा निवासी बाढ़ पीड़ित शिवकुमार गोंड, त्रिलोकी ठाकुर, शुभनारायण ठाकुर, नारायण यादव, गुडु प्रसाद, बबन ठाकुर, रामजी ठाकुर, कमलेश गोंड, रजिन्द्र गोंड, दरोगा, रविन्द्र चौधरी, पुतुल चौधरी, ब्रिजेश चौधरी, दिनेश गोन्ड, हरिशन्कर गोंड, करीमन राम, अरविन्द राम, इन्द्र्जीत चौधरी, शेखर शर्मा, अरूण , मुरारी प्रसाद, इब्राहीम खान, अखिलेश यादव, कमलेश यादव के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है।