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सीएम साहब का आदेश ठेंगे पर, अब भी टेंट में रात गुजार रहे बाढ़ पीड़ित

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हल्दी के राजपुर एकौना में नाव नहीं मिलने पर बालक को कंधे पर उठा कर अस्पताल ले जाता युवक - फोटो : BALLIA
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बलिया। जिले में बाढ़ राहत कार्य पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। बाढ़ पीड़ितों को न तो राहत राशि मिली और न ही राहत सामग्री। शासन से 16 और 17 सितंबर के बीच बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गई राहत सामग्री नहीं बांटी गई है। मुख्यमंत्री के आदेश के तीन दिन बाद भी बाढ़ पीड़ित ढाई हजार परिवारों को सामुदायिक भवनों और स्कूलों में शरण नहीं दी गई है। पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे और टेंटों में जीवन बसर कर रहे हैं।
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मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को 12 घंटे के अंदर बाढ़ पीड़ितों को सहायता राशि देने और राहत सामग्री बांटने का निर्देश दिया था। पशुओं के लिए चारे आदि की व्यवस्था करने और बाढ़ पीड़ितों को सामुदायिक भवनों और स्कूलों में शरण देने के भी सख्त आदेश दिया था लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। बाढ़ पीड़ितों कोई भी सुविधा नहीं दी गई है। उधर, मंगलवार और बुधवार को लगातार हुई बारिश ने बाढ़ पीड़ितों को तोड़कर रख दिया। मंगलवार को करीब नौ घंटे की लगातार बारिश और तेज हवा ने जहां बाढ़ पीड़ितों के टेंटों को उड़ा दिया, वहीं उनकी गृहस्थी का सामान और बिस्तर आदि भीग गए। आंखों में आंसू लेकर ये लोग पूरी रात खुले आसमान में गिले बिस्तर पर बैठ आसमान की ओर बारिश के रुकने की प्रार्थना करते रहे। वहीं बुधवार को भी दिन में कई बार रुकरुक कर बारिश होती रही। ऐसे में दूसरे दिन भी रात में उन्हें गीले बिस्तरों के चलते जाग कर ही रात गुजारनी पड़ी।
सूत्रों की माने तो बैरिया में राहत सामग्री 16-17 तारीख को ही आ गई थी। बावजूद इसके राहत सामग्री नहीं बांटी गई। इसकी जानकारी जिला प्रशासन को भी है। वहीं, एक राजनीतिक दल के नेता पर राहत सामग्री न बंटने देने का भी मामला सामने आ रहा है। इस संबंध में जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने संबंधित अधिकारियों को फटकार भी लगाई है।
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