बलिया। प्रदेश सरकार आबादी पर नियंत्रण की तैयारी कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने रविवार को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर राज्य में नई जनसंख्या नीति की घोषणा की। नई नीति में वर्ष 2026 तक जन्मदर को प्रति हजार आबादी पर 2.1 तथा वर्ष 2030 तक 1.9 फीसदी लाने का लक्ष्य रखा है। इस नीति के तहत दो से अधिक बच्चे वालों को स्थानीय निकाय चुनाव (नगर निकाय से लेकर पंचायत चुनाव तक) से वंचित रखे जाने की अहम सिफारिश राज्य विधि आयोग ने की है।
सभी मानते हैं कि यह व्यवस्था पूरे देश में होनी चाहिए, तभी हम आर्थिक और सामाजिक विकास की राह पर दौड़ सकते हैं। सरकार के इस निर्णय को बुद्धिजीवियों ने भी सराहा है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण के बिना देश और प्रदेश का विकास संभव नहीं है। इससे सामाजिक व आर्थिक विकास भी होगा। चिकित्सकों का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कई योजनाएं संचालित हैं लेकिन इसका रिजल्ट इसलिए अच्छा नहीं आ रहा कि इसको लेकर कोई नीति नहीं थी। अब जनसंख्या नियंत्रण को लेकर नीति निर्धारित हो जाएगी तो इसका सभी योजनाएं असरकारक होंगी और इसका लाभ समाज को मिलेगा।
सरकार का यह निर्णय सराहनीय है। जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए सालों पहले से कई योजनाएं संचालित हैं लेकिन अपेक्षाकृत परिणाम अनुकूल नहीं आ रहे। इसके लिए नीति की आवश्यता थी। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर नीति बन जाने के बाद लोग इसे मानने को बाध्य होंगे। जनसंख्या नियंत्रण का लाभ सीधे समाज को मिलेगा। बच्चों का लालन, पालन अच्छा होगा और समाज भी शिक्षित होगा और समाज में विकृतियां कम होंगी। - डॉ एसके तिवारी, चिकित्साधिकारी
जनसंख्या नियंत्रण की नई नीति प्रदेश ही देश के लिए जरूरी है। देश को विकसित की श्रेणी में शामिल होने में बढ़ती आबादी एक बाधक है। जनसंख्या नियंत्रण की नई नीति से समाज का निश्चित रुप से विकास होगा। समाज का विकास होने पर प्रदेश व देश का भी विकास होगा। इसके अलावा जनसंख्या नीति मानने वालों को सरकार की ओर से कई तरह की सुविधाएं देने की भी बात कही जा रही है। इसका भी असर लोगों पर पड़ेगा। - प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य, राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज