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आग लगी तो लापरवाही पड़ सकती है भारी

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नगर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती मरीज। (फाइल फोटो) - फोटो : BALLIA
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बलिया। मानकों को ताक पर रखकर जनपद में काफी संख्या में नर्सिंग होम एवं क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। यहां तक कि जिला अस्पताल सहित किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ने अग्निशमन विभाग से एनओसी प्राप्त नहीं किया है। नर्सिंग होमों में मानक के अनुरूप अग्निशमन यंत्र तथा सुरक्षा से संबंधित उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं। इतना ही नहीं, वहां तक अग्निशमन विभाग की गाड़ी पहुंचने के लिए कोई रास्ता तक नहीं है। अगर किसी कारणों से कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो इस पर नियंत्रण पाना अग्निशमन विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित होगी।
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कोर्ट का सख्त निर्देश है कि भवन के बेसमेंट में वाहन पार्किंग के अलावा कोई भी कार्य नहीं होगा, लेकिन नर्सिंग होम, क्लीनिक संचालक भवन के बेसमेंट में पैथोलॉजी, एनआईसीयू और एक्स-रे सहित तमाम चीजें संचालित कर रहे हैं। स्वास्थ्य महकमा की उदासीनता के कारण जनपद में कई नर्सिंग होम और अस्पताल अवैध रूप से संचालित हैं। जबकि मुख्य चिकित्सालय कार्यालय में करीब 43 नर्सिंग होम ही पंजीकृत हैं। इन नर्सिंग होम और अस्पतालों में न आग से बचने के इंतजाम हैं और न ही आपात स्थिति में निकलने के लिए कोई आपातकालीन द्वार की व्यवस्था है। इसके अलावा, गंभीर मरीजों को अस्पताल व नर्सिंग होम के पास तक वाहन ले जाने के लिए कोई रास्ता तक नहीं है। नगर में अधिकांश नर्सिंग होम और अस्पताल गली में संचालित हैं। अधिकांश नर्सिंग होम और अस्पतालों के बेसमेंट में पैथालॉजी, एक्स-रे, एनआईसीयू, वार्ड व ओपीडी तक संचालित हो रहे हैं। जबकि कोर्ट का निर्देश है कि बेसमेंट में वाहन को छोड़कर कोई भी दूसरा कार्य संचालित नहीं किया जा सकता है। बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन निजी अस्पतालों पर लगाम नहीं लगाई जाती है। जब किसी नर्सिंग होम या अस्पताल में घटना घटित हो जाती है तो स्वास्थ्य महकमा द्वारा टीम गठित कर एक-दो दिन छापेमारी कर खानापूर्ति कर दी जाती है। कुछ दिनों बाद मामला पुन: ठंडा बस्ते में चला जाता है।
ज्यादातर दावे खोखले
बलिया। सीएमओ कार्यालय में रजिस्ट्रेशन के दौरान नर्सिंग होम और अस्पतालों की ओर से मानकों को पूरा करने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन ज्यादातर ये दावे खोखले होते हैं। यहीं नहीं रजिस्ट्रेशन के दौरान एनओसी फाइल भी की जाती है। जिसमें प्राइवेट अस्पताल सारे मानकों को पूरा करने की बात करते हैं। लेकिन सच्चाई कुछ और ही बयां करती हैं। अग्निशमन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष भवन का ऑनलाइन एनओसी शांति अस्पताल शंकरपुर, उमा देवी नेत्रालय वायना, डीएन सूर्या हास्पीटल बेल्थरारोड द्वारा लिया गया है। शेष किसी भी नर्सिंग व अस्पताल ने अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना मुनासिब नहीं समझा है। बावजूद स्वास्थ्य महकमा उदासीन बना हुआ है। जबकि इसके लिए सीएमओ को कई बार पत्र भी अग्निशमन विभाग द्वारा भेजा चुका है।
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दो नर्सिंग होम पर छापेेमारी कर हुई खानापूर्ति
बलिया। महाराष्ट्र के भंडारा जिले के एक अस्पताल की सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट में आग लगने से 10 बच्चों की मौत हो गई। जिसके बाद जिलाधिकारी द्वारा गठित चार सदस्यीय टीम ने शनिवार को दोपहर नगर के दो नर्सिंग होम पर छापे की कार्रवाई की। लेकिन इसके बाद छापे की कार्रवाई बंद हो गई, जिससे नर्सिंग होम संचालकों की चांदी कट रही है।
यह हैं मानक...
- अस्पताल में दो सीढ़ी होना चाहिए।
- अस्पताल में फायर सर्विस यंत्र होना चाहिए।
- अस्पताल में आपातकालीन खिड़की होनी चाहिए।
- अस्पताल के चारों तरफ छह मीटर का रास्ता होना चाहिए।
- अस्पताल तक पहुंचने के लिए 18 मीटर का रास्ता होना चाहिए।
- नर्सिंग होम में अलार्म सिस्टम होना चाहिए।
- नर्सिंग होम में हाईड्रेंट सिस्टम लगा होना चाहिए।
- अस्पताल में पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
- बेसमेंट में पैथॉलोजी, एक्स-रे, एनआईसीयू, ओपीडी, वार्ड, वेटिंग रूम आदि
नहीं होना चाहिए।
तीन नर्सिंग होम को छोड़ किसी ने भी एनओसी नहीं लिया है। यहां तक कि जिला अस्पताल सहित सीएचसी व पीएचसी ने भी एनओसी नहीं लिया है। - धीरेंद्र सिंह यादव, अग्निशमन अधिकारी
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