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देशहित में सरकार और किसान दोनों को झुकना पड़ेगा: युगल किशोर

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नगरा। केंद्र सरकार को किसानों से गंभीरता पूर्वक बातचीत कर हल निकालना चाहिए। भारतीय किसान संघ ने जून 2020 से पहले ही तीनों कानूनों में संशोधन की बात उठाई थी। सरकार को जगाने के लिए बीस हजार ग्राम समितियों से पारित प्रस्ताव कृषि कानूनों में संशोधन हेतु प्रधानमंत्री एवं कृषि मंत्री को भेजा गया है।
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उक्त बातें भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष युगुल किशोर मिश्र ने रविवार को अपने आवास पर अमर उजाला से बातचीत में कही। कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भी पक्षकार बनाने हेतु भारतीय किसान संघ ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। भारतीय किसान संघ समर्थन मूल्य को कानूनन लागू करने की मांग करता है। निजी व्यापारियों का केंद्र एवं राज्य स्तर पर बैंक गारंटी के साथ पंजीयन हो, इसकी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए। वहीं, सरकार किसान हित में जिला स्तर पर कृषि न्यायालय की स्थापना करें एवं जीवनाशक वस्तु अधिनियम से निर्यातक तथा प्रसंस्करण करने वाले बड़े उद्योगों को दी गई छूट को सरकार वापस ले। सरकार किसानों का विश्वास हासिल करे। किसान संघ आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए सदस्यता संख्या बढ़ाने को गांवों में किसानों के पास जाएगा। वर्तमान में तीन लाख भारतीय किसान संघ के सदस्य हैं, जिन्हें 75 लाख तक बढ़ाने का लक्ष्य बंगलौर बैठक में लिया गया है। कहा कि सरकार और किसान दोनों को झुकना पड़ेगा क्योंकि देश की खुशहाली का रास्ता खेत खलिहानों से होकर जाता है।
ट्रंप की नीतियों पर चल रही केंद्र सरकार: ईश्वरी
सिकंदरपुर। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानून किसानों और गरीब मजदूरों की मौत का कारण बनेगा। यह सरकार ट्रंप की नीतियों की सरकार है। इस किसान बिल से देश के किसानों का भला नहीं होने वाला। यह बातें अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने रविवार को भाकपा माले के जिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। बताया कि सरकार इस बिल को लाकर लोकतंत्र की हत्या करते हुए किसानों के साथ अन्याय कर रही है। किसानों द्वारा किए जा रहे जन आंदोलन को भी दबाने का काम किया जा रहा है। आज किसानों की आवाज को पूंजीपतियों के दबाव में नहीं सुनी जा रही है, जो आने वाले समय के लिए घातक है। इस मौके पर श्रीराम चौधरी, लालसाहब गौतम, भागवत बिंद, लक्ष्मण यादव, नियाज अहमद, वशिष्ठ राजभर, बसंत सिंह, सामरिया देवी, लीलावती, रेखा पासवान, जितेंद्र पासवान, युसूफ खान, राजू राजभर, राधेश्याम चौहान आदि रहे।
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