जयप्रकाशनगर क्षेत्र के नरहरिपुरी स्थित प्राचीन श्री नरहरि धाम मठ।संवाद
जयप्रकाश नगर। सावन मास शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में गंगा और घाघरा नदियों के बीच नरहरिपुरी स्थित प्राचीन श्री नरहरि धाम मठ में तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रदेश और जनपद के पूर्वी छोर पर स्थित यह धार्मिक स्थल द्वाबा का देवघर भी कहलाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस पावन स्थल का उल्लेख श्री वाल्मीकि रामायण में मिलता है तथा यह भगवान शिव की तपोस्थली रही है। हर वर्ष सावन में यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जनकपुर यात्रा के दौरान महर्षि विश्वामित्र भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ इस मठ पर एक रात्रि विश्राम के लिए रुके थे। पूरी रात सत्संग के बाद प्रातःकाल हवन-पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद मठ के पूर्वी छोर पर गंगा और सरयू के संगम स्थल से नदी पार करते समय महर्षि विश्वामित्र ने श्रीराम और लक्ष्मण को दोनों नदियों की महिमा का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि शास्त्रों में सावन के प्रत्येक सोमवार, शिवरात्रि, रुद्राभिषेक, जप, तप और जलाभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने में सच्ची श्रद्धा से भगवान शिव की आराधना करने पर भक्तों पर उनकी विशेष कृपा होती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सावन मास में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर धर्म लाभ अर्जित करने का आह्वान किया।