नगर के रामनगीना मार्ग स्थित सैनेटरी गली की सफाई करते नपा कर्मचारी।
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बलिया। करीब एक दशक से उपेक्षित रही शहर की सेनेटरी गलियों की सफाई की कवायद मंगलवार की शाम शुरु हो गई। हालांकि बुधवार को दिनभर हुई बूंदाबांदी से सेनेटरी गलियों की सफाई का काम बाधित रहा, लेकिन नगर पालिका प्रशासन इन गलियों को साफ करने को लेकर अब संजीदा नजर आ रहा है। यह सब कुछ अमर उजाला के 28जून के अंक में प्रकाशित खबर ऽस्वच्छता की गलियां बनीं कचरे का घर, सुध नहीं लेते अफसरऽ शीर्षक से प्रकाशित के बाद हुआ, जिसमें शहर की करीब 100 सेनेटरी गलियों की उपेक्षा और पिछले दस वर्षों से नगर पालिका द्वारा कागजों पर कराई जा रही सफाई की कलई खोली गई थी। खबर का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने मंगलवार को पत्र जारी कर नगर की सेनेटरी गलियों तत्काल व शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर साफ-सफाई करने का निर्देश दिया। डीएम के आदेश के बाद हरकत में आए ईओ विहीन नपा प्रशासन ने आनन-फानन में सेनेटरी गलियों की सफाई में जुट गया। इसके लिए सफाई कर्मियों की फौज उतार दी गई।
बता दें कि स्वच्छता को लेकर शासन की ओर से नित नए प्रावधान किए जा रहे हैं। बरसात के दिनों में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए कई तरीके के सफाई अभियान चलाने के आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन नगर पालिका बलिया इससे बेपरवाह रहा। जिसका परिणाम रहा कि शहर की गलियों में गंदगी का अंबार लगा था और जापलिनगंज और भुगुआश्रम मोहल्ला समेत नागाजी गली, धोबी मोहल्ला, नया चौक जैसी कई गलियों में कूड़े का अंबार लगा था। इससे आसपास के लोगों का जीना दुश्वार हो गया था। कूड़े के अंबार से बदबू आती थी, जिससे बरसात में हालात और नारकीय हो जाएंगे। इसके बाद भी इस गंदगी पर पालिका की नजर नहीं पड़ती थी। इससे संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया था।