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क्षमता के मुताबिक नहर ने पानी छोड़ा तो टेल तक पहुंचेगा

Tue, 31 May 2016 10:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
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सूखी पड़ी पंप कैनाल की नहर।
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बलिया जिले के सैकड़ों ग्रामों के हजारों एकड़ कृषि भूमि को सिंचित करने  वाली दोहरीघाट सहायक परियोजना मुख्य नहर पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं  की जा रही है। जिससे खेतों की समुचित सिंचाई नहीं हो पा रही है।
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ऐसे में  प्रकृति की रहमों करम पर किसानों को भरपूर उपज नहीं मिल पाती है। इसको लेकर  किसानों में नाराजगी है। जिले को सिंचाई सुविधा से लाभांवित करने के  लिए घाघरा तट पर स्थित दोहरी घाट सहायक परियोजना से जल की आपूर्ति की जाती  है।

छह किमी तक पक्की और विभिन्न राजवाहों समेत दर्जनों शाखा नहरे संचालित  होती है। छोटी-छोटी नहरों के माध्यम से पूरे जनपद के 1/3 हिस्से के खेतों  की सिंचाई करती है। नहर को चलाने के लिए दस बड़े-बड़े पंप लगाए गए है।  जिसमें प्रत्येक पंप से 78 क्यूसेक पानी की आपूर्ति होती है।
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लेकिन उचित  रख-रखाव नहीं किए जाने से नहर के सिंचाई संयत्रों में तकनीकी गड़बड़ी होती  रहती है। जिससे कोई न कोई पंप हमेशा खराब रहता है। तकनकी गड़बबड़ी से  बार-बार जलापूर्ति बाधित होने से सिंचाई सुविधाओं का लाभ आमजन को नहीं मिल  पाता है।

कभी पानी का अभाव तो कभी जरूरत न होने पर पानी की अधिकता। ऐसे में  नहरों सुविधा के  बावजूद सिंचाई सुविधा का लाभ नहीं मिलता है। सरकारी  नलकूपों की स्थिति भी ठीक नहीं है। नहरों में झाड़-झंखाड़ और शिल्ट की सफाई  न किए जाने से टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है।

सभी दस पंपों को पूरी  क्षमता से चालू कर दिया जाए तो सिंचाई के लिए किसानों की पानी किल्लत नहीं  होगी। साथ ही टेल तक भी भरपूर पानी पहुंचेगा और खेतों की आसानी से सिंचाई  होगी।
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