हाईकोर्ट से निर्दोष साबित होने और रिहा किए जाने के बाद शनिवार रात को वह घर पहुंचे। उन्हें देखते ही पिता की आंखें खुशी से छलछला उठीं, वहीं मां राजवंती देवी और पत्नी लक्ष्मी के आंखों से खुशी के आंसू गिरने लगे। इस मामले में वार्ड नं. 3 के निवासी इंद्रजीत संजीत भी आरोपी बनाए गए थे।
मुकेश ने बताया कि उच्च न्यायालय पर मुझे विश्वास था कि वहां से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा। मुझे न्याय मिला जिसके लिए मैं न्यायालय के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करता हूं। हालांकि जीवन के 14 वर्ष के बहुमूल्य समय के बर्बाद होने का भी कम मलाल नहीं है, क्योंकि जिस समय हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया, उस समय विशिष्ट बीटीसी चयन प्रक्रिया में काउंसलिंग होने वाली थी, जिसका पत्र भी बाद में आया था।