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भाई बहन चिल्ला रहे थे, पर मम्मी उन्हें पकड़कर ट्रेन से कट गई

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पति दिनेश यादव के साथ मृतक महिला पूष्पा यादव की फाईल फोटो - फोटो : BALLIA
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बलिया। हम भाई बहन स्कूल से आकर कपड़े खोल ही रहे थे कि मम्मी कपड़े पहनने लगी। हमने पूछा तो बोली मार्केट चलना है। इसके बाद छोटी बहन साक्षी व अभिषेक के साथ मुझे लेकर रेलवे लाइन की तरफ जाने लगी। लाइन के पास पहुंचकर मैंने कहा कि मम्मी मार्केट तो दूसरी ओर है। इस पर वह बोली एक मार्केट इधर भी है। फिर अचानक वह हमें लेकर रेलवे ट्रैक पर खड़ी हो गई। दूसरी ओर से ट्रेन आती दिखी तो मम्मी ने हम तीनों भाई बहनों का हाथ पकड़ लिया। बोली चलो जल्दी लाइन पार करो। हम लाइन के बीच में पहुंचे तो फिर वह अचानक वहां खड़ी हो गई। ट्रेन पास आ रही थी। यह देखकर हम तीनों चिल्लाने लगे, मम्मी जल्दी चलो नहीं तो हम मर जाएंगे। लेकिन वह जैसे कुछ सुन ही नहीं रही थी। मैं किसी तरह हाथ छुड़ाकर भागी। मेरी छोटी बहन औ भाई चीखते रहे पर जैसे मम्मी का दिल नहीं पसीजा। तभी मम्मी समेत तीनों ट्रेन से कट गए। यह कहना है ग्यारह साल की उस मासूम साक्षी का जो इस भयावह घटना के बाद जिंदा बच गई।
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साक्षी ने बताया कि पापा दिनेश यादव इंडसइंड बैंक में काम करते हैं। पहले वे छपरा में तैनात थे तो हम लोग वहीं उनके साथ रहते थे। एक साल पहले वे हम सभी को लेकर बलिया आए। यहां पहाड़ीपुर में गोपाल पांडेय के मकान में दो कमरों का फ्लैट किराए पर लेकर हम लोग रहने लगे। पापा की तैनाती मऊ में थी तो वे अक्सर ही हम लोगों के पास आ जाते थे। मंगलवार को भी वे साथ ही थे। बुधवार को सुबह भी वे ड्यूटी पर मऊ गए। शाम को वीडियो काल पर हम सभी ने आपस में बात की, तब मम्मी भी काफी खुश थी। फिर गुरुवार को सुबह भी मम्मी ने पापा को फोन किया तो हम सभी लोगों ने उनसे बात की। इसके बाद हम तीनों स्कूल चले गए।
साक्षी ने बताया कि उसकी उम्र 11 साल है। वह गुरुकुल सीनियर सेकेंड्री स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ती है। उसने बताया कि छोटी बहन 10 वर्षीय शिवांगी कक्षा तीन व भाई आठ साल का अभिषेक उसी स्कूल में कक्षा दो का छात्र था। उसने बताया कि मम्मी-पापा एक-दूसरे से काफी प्यार करते थे। उनमें कभी झगड़ा नहीं होता था। उसने बताया कि एक सितंबर को भाई का जन्मदिन था, जिसे हम लोगों ने काफी हंसी-खुशी से मनाया था। मम्मी घर का काम करने के बाद अक्सर अगरसंडा में बन रहे हमारे मकान को देखने चली जाती थी। वहां वह अक्सर मकान की तराई आदि भी करती थी। उसने बताया कि दो चाचा हैं जो दिल्ली में काम करते हैं। दोनों चाची व दादी गांव में रहती हैं।
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मेरा तो सबकुछ लुट गया : पत्नी, बेटी व बेटे की मौत की जानकारी पाकर दिनेश यादव मऊ से तत्काल बलिया के लिए चले। वे रास्ते में ही थे तभी हमने उनकी बेटी के बताए उनके मोबाइल नंबर पर काल किया। पत्नी के सुसाइड की चर्चा करते ही वे फफक पड़े और कहा कि मेरा तो सबकुछ लुट गया। रोते-रोते ही उन्होंने बताया आज दोपहर में पत्नी पुष्पा ने फोन कर अपने मायके पिता के पास जाने की इच्छा जताई थी। तब मैंने कहा था मकान बनने की वजह से अभी पैसे की तंगी है, तुम सैलरी आने तक इंतजार कर लो, उसके बाद चली जाना। इसके बाद वह कुछ नहीं बोली। आखिर उसने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया यह तो मेरी समझ में भी नहीं आ रहा है। मेरे परिवार में भी दोनों भाईयों से अच्छा संबंध है और सभी अपने परिवार के साथ खुश हैं। लेकिन पुष्पा ने पता नहीं क्यों मेरी दुनिया ही उजाड़ दी।
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