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Ballia News: बेल्थरारोड के पिन कोड के नाम से संचालित गैंग में 70 से ज्यादा सदस्य

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बलिया। उभांव थानाक्षेत्र के चर्चित आयुष हत्याकांड के पीछे सोशल मीडिया गैंग का आपसी वर्चस्व का विवाद मुख्य कारण रहा। जिला मुख्यालय से 65 किमी दूर बेल्थरारोड के पिन कोड 221715 के नाम पर मनबढ़ युवाओं द्वारा ग्रुप संचालित किया जाता था। इसमें 70 से ज्यादा सदस्य हैं। इसकी बलिया के आसपास के चार थानों के अलावा तीन जिले बलिया, मऊ व देवरिया के सीमावर्ती थाना क्षेत्रों में सक्रियता थी। हत्याकांड के बाद पुलिस सोशल मीडिया के अलावा क्षेत्र में सक्रिय आपराधिक गैंग की कुंडली खंगाल रही है। पुलिस गैंग के सदस्यों का सीजर बनाएगी। इसमें सक्रिय सदस्य के काम, मोबाइल नंबर, आमदनी, शारीरिक दक्षता, आपराधिक इतिहास, पिता व भाई व अन्य सदस्यों के नाम सहित अन्य दस्तावेज रहेंगे। पूरा पारिवारिक रिकॉर्ड पुलिस के पास रहेगा।
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अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी दिनेश शुक्ल ने बताया कि आयुष हत्याकांड के बाद गैंग की कुंडली खंगाली जा रही है। गैंग में 70 से अधिक सक्रिय सदस्य हैं। उनके आपराधिक रिकाॅर्ड के अलावा अवैध कारोबार के बारे में पता किया जा रहा है। इस बार कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा अन्य थाना क्षेत्रों में सक्रिय गैंग का भी रिकाॅर्ड जुटाया जा रहा है। इस तरह के गैंग बनाकर अक्सर मारपीट व हत्याकांड कर समाज में भय फैलाने वाले गैंग व उसके सदस्यों का सीजर (डोजियर) बनाया जाएगा। क्षेत्र में आपराधिक घटना होेने पर उसी के अनुसार कार्रवाई होगी। अपराधियों की जगह जेल में है। उन्होंने लोगों से कहा कि क्षेत्र में सोशल मीडिया या ग्रुप बनाकर सक्रिय गैंग व उसके सदस्यों के बारे में गोपनीय जानकारी दें। जानकारी देने वाला का नाम-पता गोपनीय रखा जाएगा।
संरक्षण से छोटे मामले में बच जाते हैं
सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा व किशोरों के गैंंग का आतंक बना हुआ है। इनके सदस्य सरेराह किसी की पिटाई कर देते हैं। इनके भय के कारण कोई विरोध नहीं कर पाता है। यह शहर से लेकर कस्बे में चाय-पान की दुकानों, सार्वजनिक स्थानों, स्कूल-कॉलेज के पास जुटते हैं। पिछले तीन वर्षों से हर साल चार से पांच मामले हत्या व 15 से 20 मारपीट के मामले आते हैं। स्थानीय राजनैतिक संरक्षण के कारण छोटे मोटे मामले में बच जाते हैं। हत्याकांड जैसी घटना होने पर नाम प्रकाश में आता है। कार्रवाई के नाम पर पुलिस घटना में शामिल आरोपियों पर करवाई कर खानापूर्ति करती है। गैंग के अन्य सदस्य कुछ दिनों तक अंडर ग्राउंड रहने के बाद भी फिर से सदस्यों की आपराधिक सक्रिय बढ़ जाती है।
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पांच हजार का घोषित किया था इनाम
बांसडीह कोतवाली के सामने रोहित हत्याकांड के बाद तत्कालीन एसपी देवरंजन वर्मा ने सोशल मीडिया पर सक्रिय गैंग की जानकारी देने वाले को पांच हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की थी। पुलिस की सख्ती देख गैंग के सदस्य अंडरग्राउंड हो गए थे, उनके स्थानांतरण के बाद फिर से गैंग की सक्रियता बढ़ गई है। बीट पुलिसिंग कमजोर व क्षेत्र में सक्रियता न होने के कारण जवान व खुफिया एजेंसियां इन गैंग तक नहीं पहुंच पा रही है। यह बड़े माफिया की तर्ज पर गैंग का संचालन करते हैं। इंस्टाग्राम पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें न्यायालय परिसर में किसी आपराधिक घटना में हाजिर होने आए युवकों का वीडियो लगाकर म्यूजिक लगाकर कह रहे हैं कि बलिया में रहना है तो फरसा कहना है।

पंथी, फरसा, महाकाल... नाम से चला रहे गैंग

सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर फरसा, त्रिशूल, चोटी, टांगी, राइडर, शिकारी, पंथी, रफ्तार सहित विभिन्न नामों से अलग-अलग थाना क्षेत्रों में गैँग संचालित हैं। गैंग के ह्वाट्सएप ग्रुप से जिले के हर क्षेत्र के युवा व किशोर जुड़े हैं। लोगों की मानें तो अगर गैंग के सदस्य से किसी का विवाद हो गया तो उस व्यक्ति या युवक की फोटो ग्रुप पर पोस्ट कर मारने वाले के लिए इनाम राशि तय की जाती है। इसके बाद रेकी कर उसकी पिटाई की जाती है। समाज में आतंक बनाने के लिए यह अक्सर मारपीट पर उतारू रहते हैं। पुलिस को सबकुछ मालूम होने के बावजूद मूकदर्शक बनी है।
सीजर के तहत अपराधी की पूरी कुंडली होती

सीजर (डोजियर) शब्द का प्रयोग पुलिस चर्चित अपराधी के लिए बनाती है। उसमें अपराधी का पूरा रिकाॅर्ड होता है। अपराधी के आपराधिक इतिहास के अलावा, निजी जिंदगी की जानकारी, उसके संबंध, उसकी रुचि, शारीरिक विशेषताएं व नाते रिश्तेदार व आय की पूरी जानकारी की फाइल होती है। ताकि कोई घटना होने पर पुलिस ट्रैक कर सके और नजर रख सके। अपराधी की पूरी कुंडली पुलिस के पास होती है। इसे त्रिनेत्र पर भी अपलोड किया जाता है।
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