क्षेत्र के थम्हनपुरा गांव में पिछले तीन वर्षों से बंदरों के आतंक ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव में लाल मुंह वाले बंदरों का झुंड लगातार उत्पात मचा रहा है।
बंदरों के हमले में अब तक दर्जनों महिला, पुरुष और बच्चे घायल हो चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीण भय के माहौल में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में बड़ी संख्या में बंदर घूमते रहते हैं। घर से बाहर निकलते ही कई बार अचानक लोगों पर हमला कर देते हैं। करीब दो माह पूर्व पिंकू दुबे, गिरजा देवी, जितेंद्र नाथ पांडेय और अवध बिहारी सिंह की पत्नी समेत कई लोगों को बंदरों ने काटकर घायल कर दिया था।
बंदरों के आतंक का आलम यह है कि ग्रामीण हाथ में डंडा लेकर ही घर से बाहर निकलने को मजबूर हैं।
कई लोग बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी डर रहे हैं। बंदरों को देखकर छोटे बच्चे सहम जाते हैं। कई बार डर के कारण बच्चे गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के आतंक का असर अब बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। अभिभावक बच्चों को विद्यालय भेजने में डर रहे हैं।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से गांव में बंदरों को पकड़वाने और समस्या से स्थायी निजात दिलाने की मांग की है।