गंगा की दुर्दशा को लेकर भारतीय जनमानस के क्षोभ और पश्चाताप के बावजूद नदी की अविरलता के प्रति केंद्र सरकार की नीति अदूरदर्शी है। उसकी नियत में भारी खोट है।
सरकार यह समझती है कि गंगा सफाई के नाम पर रुपये की बौछार कर समाधान ढूंढ लिया जाएगा, लेकिन यह सोच सफाई के नाम पर फिर एक आर्थिक घोटाला सिद्ध होगा।
ये बातें गंगा मुक्ति एवं प्रदूषण विरोधी अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी रमाशंकर तिवारी ने बुधवार को गंगा दशहरा की पूर्व संध्या पर स्थानीय बिचला घाट पर एक कार्यक्रम में कही। इस मौके पर गंगा भक्तों ने नदी की सफाई भी की।
तिवारी ने कहा कि मां गंगा इतिहास न बनें और विलुप्त न हों इसके पूर्व सरकार को सही कदम उठाना होगा। केंद्र और प्रदेश सरकार को सचेत करते हुए कहा कि गंगा को बांधने की कीमत देश की जनता को चुकाना पड़ रहा है।
प्रकृति के हादसे हों, इसके पूर्व ही टिहरी जलाशय के 700 फीट ऊंचे बांध से गंगा को मुक्त किया जाना आवश्यक है। सरकार का एक साल गंगा पर बतरस में गुजर गया। गंगा बांधों में कैद होकर सिसकी ले रही हैं। इस अवसर पर श्रीरामदिन, रमेश जायसवाल, अमित कुमार यादव, कृष्णकांत वर्मा, संजय कमकर, प्रवीण कुमार, मुन्ना वर्मा, सोनू गुप्त, धर्मेंद्र वर्मा तथा संत भोला दास सहित अन्य लोगों ने सफाई की।