रिटायर फौजी इंद्र सिंह को साल में तीन से चार बार सर्पदंश की पीड़ा झेलनी पड़ती थी। यह सिलसिला 1991 से शुरू हुआ और 2010 तक चला। वर्ष 1991 में पहली बार इंद्रसिंह को ड्यूटी के दौरान सांप ने डसा। इसके बाद यूपी, पुंछ, राजौरी और किन्नौर समेत कई जगहों पर ड्यूटी के दौरान उन्हें सर्प दंश झेलना पड़ा। मगर हर बार इंद्रसिंह की जान बचती रही।
नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में नागपंचमी का पर्व धूम से मनाया गया। इस दौरान जहां लोगों ने नागदेवता को दूध और लावा चढ़ाया तो वहीं अखाड़ों में पहलवानों ने दांवपेंच आजमाए। युवकों ने खेलकूद और कुश्तियों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। वहीं सुबह का माहौल छोटे गुरु का बड़े गुरु का नाग लो भाई नाग लो से गुंजायमान रहा। परंपरा के मुताबिक जिले में जगह-जगह नागपंचमी पर नागदेवता का पूजन-अर्चन दूध पिलाकर किया गया। साथ ही घरों में सुख-समृद्घि के लिए दूध-लावा छिड़का गया। मिठाईयों की खरीददारी भी की गइ। मान्यता है कि नागदेवता को दूध और लावा चढ़ाने से मन्नते पूरी होती हैं। भक्तों ने नागदेवता को दूध और लावा चढ़ाकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। इससे पूर्व प्रात:काल बच्चों के समूह गली मुहल्ले और गांव में छोटे गुरु का बड़े गुरु का नाग लोग भाई नाग लो कहते हुए घूूमते रहे।
लोगों ने इन बच्चों से नाग देवता के पर्चे खरीदे और इन्हें घरों के दरवाजों पर चिपकाया। इस दौरान जिले के विभिन्न गांवों में कुश्ती और खेलकूद का आयोजन किया गया। जिसमें युवाओं और किशोरों ने अपने-अपने कुश्ती और खेलकूद प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं अखाड़ों में पहलवानों ने दांवपेंच आजमाए। लेकिन पहले जैसा लोगों में कुश्ती और खेलकूद के प्रति उत्साह नहीं देखा गया। एक समय था जब गांव के गांव कुश्ती और खेलकूद देखने के लिए उमड़ पड़ते थे। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में अब यह सब पूरी तरह से पीछे छूटता जा रहा है।
घोघा प्रतिनिधि के अनुसार, रविवार को बांसडीह कस्बा सहित आसपास के श्रद्धालुओं ने दरांव स्थित रामजी बाबा के स्थान पर नागदेवता को दूध लावा चढ़ाया। हालांकि खराब मौसम पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ा। बांसडीह कस्बा निवासी वशिष्ठ ठाकुर ने लगभग 100 फीट लंबा बांस का झंडा उठाया। वहीं भक्त युवकों ने पूरे नगर का भ्रमण करते हुए जुलूस के रूप में तथा बाबा की जयकारा लगाते हुए रामजी बाबा के स्थान पर झंडे को स्थापित किया। इस दौरान बाबा के स्थान पर सबसे ऊंचा झंडा स्थापित करने की भक्तों में होड़ लगी रही। जुलूस में विजय कुमार गुप्त, झिझु ठाकुर, चंदन, अजय, लक्ष्मण सहित सैकड़ों भक्त रहे।