रतसर। अमर शहीद मंगल पाण्डेय की जयन्ती रविवार को जनऊबाबा साहित्यिक संस्था निर्झर एवं परशुराम युवा मंच के संयुक्त तत्वाधान में हनुमत सेवा ट्रस्ट जनऊपुर के परिसर में वैश्विक महामारी कोरोना के चलते सादगी पूर्ण तरीके से मनाई गई। कार्यक्रम की शुरूआत शहीद मंगल पाण्डेय के तैलचित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर हुई। संस्था के अध्यक्ष धनेश पाण्डेय ने कहा कि मंगल पाण्डेय ने 1857 में गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी भारत माता को स्वतंत्र करने के लिए देशवासियों के मन में आजादी की मशाल रौशन की और विश्व पटल पर बलिया का नाम स्वर्णाक्षर में दर्ज कराने का कार्य किया। परशुराम युवा मंच के अध्यक्ष सक्षम पाण्डेय रिशु ने कहा कि स्वतन्त्रता आंदोलन का इतिहास संघर्ष, साहस, त्याग, बलिदान, समर्पण व गौरव का उत्कृष्ट आख्यान है। इस मौके पर अभिनव कुमार, गौरव पाण्डेय, मनीष पाण्डेय अभिषेक पाण्डेय आदि रहे।
मंगल पांडेय की जयंती की गलत जानकारी दे रहा गूगल: कृष्णकान्त
दुबहर । बलिया की माटी में जन्मे स्वतंत्रा संग्राम के प्रथम सपूत शहीद मंगल पांडे की जन्मतिथि को लेकर उपजे संशय से जनपदवासी काफी मर्माहत हैं। ज्ञात हो कि बलिया जनपद के नगवा गांव निवासी शहीद मंगल पांडेय का जन्म 30 जनवरी 1831 को नगवां गांव में हुआ था। लेकिन वर्तमान समय में गूगल पर मंगल पांडेय की जयंती 19 जुलाई 1827 दर्शाई जा रही है, जिसको लेकर उनके पैतृक गांव ही नहीं बल्कि पूरे जनपद के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। इस संबंध में मंगल पांडेय विचार मंच के अध्यक्ष कृष्णकान्त पाठक ने कहा कि देश के इतने बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के जीवन चरित्र के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत गूगल को नहीं होनी चाहिए। इसके लिए भारत सरकार को पहल कर उनकी जयंती में सुधार करवा कर सही तिथि अंकित करानी चाहिए।