हनुमानगंज स्थित सिंहोरा गोदाम बनकर तैयार हुआ सिंहोरा।
- फोटो : BALLIA
लॉकडाउन के चार चरणों ने वैसे तो कमोवेश सभी कारोबार को खासा प्रभावित किया है, लेकिन जिले का सिन्होरा उद्योग इससे ज्यादा प्रभावित हुआ है। कारण कि लॉकडाउन के चलते गर्मी के मौसम में होने वाले वैवाहिक कार्यक्रम स्थगित हो गए हैं। ऐसे में सिन्होरा कारोबारी और इस व्यवसाय से जुड़े कामगारों के समक्ष दो वक्त की रोटी का संकट हो गया है।
सिन्होरा कारोबारी बबलू ने बताया कि सालाना पांच करोड़ का व्यवसाय करने वाला यह उद्योग लॉकडाउन के कारण एक लाख के अंदर सिमट गया है। इससे सिन्होरा कारोबारियों के समक्ष पूंजी बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। बताया कि सप्ताह में तीन दिन दुकानों को खोलने की अनुमति से क्षतिपूर्ति होना संभव नहीं है। जानकारों की मानें तो सप्ताह में तीन दिन दुकानें खुलने से महज बीस फीसदी का व्यवसाय हो रहा है। इससे दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन भी निकाल पाना मुश्किल हो रहा है। इससे कामगार भी परेशान हैं। कहा कि बाजार तो मुख्यतया लगन में ही चलता था, लेकिन लॉकडाउन के चलते सभी वैवाहिक गतिविधियां या तो ठप हैं या फिर नवंबर, दिसंबर तक टल गई हैं। और तो और काम-धंधा बंद होने से ग्राहकों की आय भी बाधित हुई है, इससे उनकी क्रय क्षमता में कमी आई है, जो सीधे व्यवसाय को प्रभावित कर रही है।
गैर प्रांतों में होती थी आपूर्ति
जिले के हनुमानगंज में बनने वाले सिन्होरा की आपूर्ति सूबे के वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज जनपदों के अलावा बिहार के छपरा, सिवान, बक्सर, आरा, गोपालगंज के अलावा पश्चिम बंगाल के कोलकाता, सिलीगुड़ी, बर्दवान, आसनसोल आदि जिलों में निर्यात की जाती है। लॉकडाउन के चलते सिन्होरा के निर्यात भी ठप पड़ गया है।