नगरा। ब्लाक क्षेत्र के दर्जनों गांव गैर प्रांतों से सीधे घर पहुंच रहे प्रवासी श्रमिकों से पट गए हैं। जिससे गांवों में अफरा-तफरी का माहौल है। ग्रामीण दहशत के माहौल में रह रहे हैं। उन्हें गावों में कोरोना वायरस फैलने का डर सताने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाहर से आए श्रमिकों को होम क्वारंटीन कराने की बजाय गांव के बाहर रहने की व्यवस्था प्रशासन को करानी चाहिए, लेकिन जांच के नाम पर बाहर से आए प्रवासियों का थर्मल स्कैनिंग की औपचारिकता पूरी कर जिला प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ ले रहा है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। प्रवासियों का थर्मल स्कैनिंग कर होम क्वारंटीन की पर्ची थमाकर उन्हें घर भेजा जा रहा है, लेकिन वे घरों में रहने के बजाय गावों में स्वछंद विचरण कर रहे है। मना करने पर भी वे किसी की बातो को मानने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा संबंधित गांवों के प्रधानों, सचिवों, रोजगार सेवकों एवं आशा कार्यकत्रियों को प्रवासियों के दिनचर्या की सूचना विकास खंड स्तर पर बनाई गई टीम को देने के लिए निर्देश दिया गया है, बावजूद समस्या कम नहीं हो रही है। ब्लाक से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। इनको जानकारी तक नहीं है कि किस गांव में कहां से कितने प्रवासी मजदूर आये हुए हैं। इस बाबत नोडल अधिकारी डा. अमित कुमार राय ने बताया कि जहां-जहां श्रमिकों के पहुंचने की जानकारी मिल रही है, वहां पर टीम भेजकर होम क्वारंटीन कराया जा रहा है।
इन गांवों में पहुंचे लोग कर रहे उल्लंघन
नबरा। क्षेत्र के भीमपुरा नंबर दो, अतरौली करमौता, तियरा हैदरपुर,ताड़ी बड़ा गॉव, चचया, अब्दुलपुर मदारी, करौंदी, कसौंडर, बिसरूप, इंदाशो, देवडि़या, परशुरामपुर, कोठियां, करनी आदि ग्राम पंचायतों में महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात से पहुंचे श्रमिक एकांतवास का उल्लंघन भी कर रहे हैं।