बलिया। जिले में कई बार आई तेज आंधी ने बागवानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। आंधी व पानी से करीब 80 प्रतिशत कच्चे आम टूट कर गिर गए हैं।
अधिकांश कच्चे आम पेड़ों से टूटकर गिर गए, जिससे बागवानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। टूटकर गिरे हुए आमों की बाजार में कीमत नहीं मिल रही है। बागवानों का कहना है कि इस बार फसलों पर लगातार मौसम की मार पड़ रही है।
पहले समय पर बारिश नहीं हुई, फिर तेज गर्मी ने पेड़ों को प्रभावित किया और अब आंधी ने बची हुई उम्मीद भी खत्म कर दी। जिन किसानों ने बाग ठेके पर लेकर खेती की थी, उनके लिए यह नुकसान और भी बड़ा साबित हो रहा है। कई परिवारों की सालभर की आमदनी आम की फसल पर ही निर्भर रहती है। चौकियामोड़ इलाके में आम के पेड़ों पर समय के मुताबिक बौर खूब आए, वहीं जहां फल लगे भी वहां समय से पहले गिरने और खराब होने की समस्या सामने आई। सिकंदरपुर में इस वर्ष आम की फसल खराब होने से क्षेत्र के बागवानी करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। आम के पेड़ों पर अपेक्षित फल नहीं आ सके, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आम की पैदावार प्रभावित होने से किसानों के सामने बच्चों की फीस जमा करने, एडमिशन कराने तथा अगली फसल की बुआई के लिए धन की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है।