मंगल पांडेय की 1857 की क्रांति के बदौलत ही देश आज आजाद है। आजादी के 69 वर्ष बाद भी देश के नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। भारत को बनाने की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है।
उक्त बातें मंगलवार को नगवां इंटर कालेज में आयोजित मंगल क्रांति दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उप्र सैनिक कल्याण संस्थान के निदेशक दयाशंकर दूबे ने कहीं। कहा कि आज ही के दिन मंगल पांडेय ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था।
कहा कि जिस सपने को लेकर देश के शहीदों ने अपनी कुर्बानी दी उसके अनुरूप भारत बनाने की जिम्मेदारी आज के युवाओं पर है। आज की सरकारों को मंगल पांडेय जैसे शहीद सैनिक की कुर्बानी के नाम पर उनकी गरिमा के अनुरूप इस क्षेत्र के विकास तथा उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए।
डॉ. जनार्दन राय ने कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण चिंता का विषय है। क्योंकि किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास में नैतिकता का बहुत बड़ा योगदान होता है। वरिष्ठ रंगकर्मी विवेकानंद सिंह ने शहीद मंगल पांडेय के कुर्बानी को याद रखने के लिए सरकारों को उचित कदम उठाने की सलाह दी।
दुबहर प्रधानसंघ के अध्यक्ष विनोद सिंह ने कहा कि यह पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। मंगल पांडेय सरीखे वीर इसी नगवा के धरती में पैदा हुए। इंटर कालेज नगवां के प्रबंधक डॉ. बृकेश पाठक ने कहा कि मंगल पांडेय के नाम पर संचालित योजनाओं को और विकसित करने की आवश्यकता है।
इंटर कालेज तथा डिग्री कालेज में महत्वपूर्ण विषयों की मान्यता अति आवश्यक है। कार्यक्रम में नगवां निवासी सरल महात्मा ने स्वागत गीत तथा भरत यादव एवं विजय पाठक ने मंगल पांडेय पर वीरता के गीत गाकर लोगों में उत्साह पैदा किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विचार मंच के अध्यक्ष कृष्णकांत पाठक, संचालन रणजीत सिंह ने किया। बैठक में मुख्य रूप से रमाशंकर तिवारी, आनंद स्वरूप शुक्ला, सूर्यनारायण पाठक, परमात्मा पांडेय, अरुण सिंह, घनश्याम पांडेय, नफीस अख्तर, विमल पाठक, नितेश पाठक, श्याम सुंदर गिरी, नागेश्वर सिंह, शिवनाथ यादव, पन्ना लाल, राजू मिश्र, डॉ. हरेराम, रवि राय आदि लोग मौजूद रहे।