बेमौसम बरसात ने किसानों की कमर तोड़ दी है। रविवार को शुरू हुई बूंदाबांदी दूसरे दिन तेज हो गई। इससे किसानों की कमर टूट गई है। दलहनी-तिलहनी फसल के साथ ही आलू और सब्जी की खेती भी नष्ट हो गई है।
साथ ही आम की पैदावार पर भी बरसात का प्रतिकूल असर पड़ेगा। पहले से मौसम की मार झेल रहे किसानों की रही-सही कसर बारिश ने पूरी कर दी है।
इस साल मौसम किसानों के ऊपर आफत बनकर आ रही है। इसका खामियाजा गड़हांचल के किसान भुगत रहे हैं। बेमौसम बारिश ने बड़े पैमाने पर खेती को नुकसान पहुंचाया है।
बारिश के रूप में किसानों पर आफत बरस रहा है। टुटुवारी के किसान कृष्णानंद राय, बघौना के राम निवास राय, भरौली के अक्षय कुमार राय, सुरहीं के संजय राय, नमोनारायण यादव, राम अवध यादव, नरहीं के प्रेमकुमार राय, शैलेंद्र राय, बब्बन जी ने बताया कि गंगा के तटवर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर सब्जी परवल, भिंडी, नेनुआ, तरबूज, ककरी, खीरा, करेला, लौकी, बैगन, मिर्चा आदि की खेती को बारिश ने प्रभावित किया है। गड़हांचल के करईल क्षेत्र में सिर्फ मसूर की खेती से किसानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। कुल मिलाकर इस बारिश से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही है।
गड़वार प्रतिनिधि के अनुसार बेमौसम बारिश के चलते लोगों को एक बार फिर गुलाबी ठंड का अहसास हुआ। चट्टी-चौराहों पर लोगों की चहल-पहल पर भी इसका खासा असर देखा गया। वहीं कीचड़ के चलते राहगीरों खासकर स्कूली बच्चों को काफी दिक्कतें हुई।
बैरिया संवाददाता के मुताबिक बरसात से इलाके में जगह-जगह जलजमाव हो गया। आलू की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। आलू बाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 2500 रुपये की लागत लगी है। हजारों एकड़ में क्षेत्र में आलू की फसल बोई जाती है। आधे से अधिक आलू की कोड़ाई हो चुकी है। जबकि बचा हुआ आलू नष्ट हो चुका है। दलहनी तथा तिलहनी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।