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आतंक पर चोट, व्यंग्य से किया लोटपोट

Thu, 05 Feb 2015 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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दारूल उलूम सरकारे आछी के नवानगर स्थित प्रांगण में बुधवार देर शाम शेख वासित अली की स्मृति में आल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक शायरी पेश किए। हाशिम फिरोजावादी की व्यंग्य की लाइनें ‘जब से संसद भवन में पहुंचा हूं धूप भी सायवान लगती है...’ सुनकर खूब तालियां बजी।
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असद मस्तान खलिलावादी ने जब सुनाया कि ‘मुशायरा नगर के आगे न गद्दार के आगे, हर एक सर झुका है मेरे सरकार के आगे..’ प्रस्तुत कर महफिल में शमा बांध दिया।

 शब्बा बलरामपुरी ने अपनी रचना ‘हर सहेली मेरी, खुदा क ी कसम मुझसे नाराज दिखने लगती है...’ प्रस्तुत कर लोगों का दिल जीत लिया। वहीं वाहिद अंसारी मुंबई ने आतंकवाद पर चोट करते हुए आगाह किया कि ‘पहले तालिम से तुम मोड़ दिए जाओगे, फिर किसी जुल्म से तुम जोड़ दिए जाओगे...।’

बादशाह तिवारी ने अपनी रचना से लोगों को लोटपोट किया। गुलशब्बा फतेहपुरी ने अपनी रचना ‘सारा पानी महक उठेगा शब्बा झील में उनका    पांव धोने दो...’ प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी।
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कमबख्त जौनपुरी नंदजी नंदा जीएम रसिडी, बादल वालियावी, राम प्रसाद सरगम आदि ने भी रचनाएं प्रस्तुत की। वहीं  भाजयुमो के जिला उपाध्यक्ष ओंकार सोनी ने मुख्य अतिथि सहित सभी रचनाकारों को सम्मानित किया।
 
इस अवसर पर मुख्य रूप से विधायक मुहम्मद रिजवी, शेख वासिफ अली, मनसफ अली, तहसीलदार गुलाम सरोवर, रेयाज अहमद, संजय भाई आदि मौजूद रहे।

 अध्यक्षता शेख रासिद अली और संचालन शंकर कैमूरी ने किया। सभी आगंतुकों के प्रति मुशायरा के आयोजन रहबर सिकंदरपुरी ने आभार प्रकट किया। इससे पहले शुभारंभ पूर्व केंद्रीय मंत्री मुहम्मद अली असरफ फातिमी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुशायरा का शुभारंभ उस्मान काबिस ने अपनी रचना के साथ की। पूरी रात शायरों ने महफिल को गुलजार रखा।
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