बलिया। पंचायत चुनाव में दोनों हाथों से रुपये लुटाने वाले उन प्रधानों को झटका लगा है, जो चुनाव में खर्च हुई धनराशि की भरपाई करने के फिराक में हैं। विभाग ने कहा है कि संगठित ग्राम पंचायतों में पहले गांव की खुली बैठक में कार्ययोजना तैयार होगी और अधिकारियों की संस्तुति मिलने के बाद ही विकास कार्य होंगे। हालांकि विभाग ने प्रधानों का डोंगल पंजीकरण करके पासवर्ड जारी करने पर रोक नहीं लगाई है।
जिले की 940 ग्राम पंचायतों में 686 पंचायतें संगठित हो चुकी हैं। नवनिर्वाचित प्रधानों के डोंगल का रजिस्ट्रेशन करके पासवर्ड दिया जा रहा है। पासवर्ड पाने वाले प्रधानों की नजर ग्राम पंचायतों में डंप पड़ी धनराशि पर टिकी है। अधिकांश प्रधान बगैर विकास कार्य कराए ग्राम पंचायत के खाते में पड़ी धनराशि निकाल कर चुनाव में खर्च हुई धनराशि की भरपाई करना चाहते हैं। इस बात का अंदेशा अफसरों को भी है। विभागीय अफसरों ने साफ कर दिया है कि जो ग्राम पंचायतें संगठित हो चुकी हैं, वहां खुली बैठक में कार्ययोजना तैयार करके उसे ऑनलाइन फीड कराना जरूरी है। कार्ययोजना पर अधिकारियों की मुहर लगने के बाद ही धनराशि निकालने को कहा है।