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Ballia News: चंद्रग्रहण आज, सुबह 9 बजे से बंद रहेंगे मंदिरों के कपाट

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नगर के बाबा बालेश्वर मंदिर परिसर।
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बलिया। इस वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने वाला खग्रास चन्द्रग्रहण भारत में ग्रस्तोदित खंडचंद्रग्रहण ग्रहण के रूप में दृश्य होगा। इसके चलते बाबा बालेश्वर नाथ के साथ अन्य मंदिरों के कपाट मंगलवार की सुबह 9 बजे से ही बंद हो जाएंगे। उसके बाद मोक्ष होने के बाद ही खुलेंगे।
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इस दौरान मंदिरों पर संकीर्तन समेत अन्य कार्यक्रम का आयोजन भी होगा। बाबा बलेश्वर मंदिर कमेटी के प्रबंधक अजय कुमार चौधरी डब्लू ने बताया की सुबह 9 बजे बाबा का कपाट बंद हो जाएंगे। भक्तगण उसके पहले दर्शन पूजन कर सकते हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि यह ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशान्त महासागर और अमेरिका में दिखाई देगा। चन्द्रास्त के समय ग्रहण का प्रारम्भ प्रारम्भ अर्जेन्टिना, पराग्वे के कुछ भाग, बोलीविया, ब्राजील, ग्रीनलैंड और उत्तरी अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा। चन्द्रोदय के समय ग्रहण का अन्त रूस, कजाकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, मालदीव और हिन्द महासागर में दिखाई देगा। भारतीय मानक समयानुसार ग्रहण का प्रारम्भ दिन में 3 बजकर 20 मिनट पर, मध्य सायं 5 बजकर 4 मिनट पर तथा मोक्ष सायं 6 बजकर 47 मिनट पर होगा।
चन्द्रोदय के समय भारत के सभी स्थानों में इस ग्रहण का मोक्ष दिखाई देगा। इस ग्रहण का प्रारम्भ भारत के किसी स्थान में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि चन्द्रोदय होने से पूर्व ग्रहण प्रारम्भ हो जाएगा। खग्रास चन्द्रग्रहण का मोक्ष भारत के सुदूर पूर्वी भागों में दिखाई देगा। देश के बाकी हिस्सों में खण्ड चन्द्रग्रहण का मोक्ष ही दिखाई देगा। काशी में चंद्रोदय 5 बजकर 59 पर व मोक्ष सायं 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। काशी में सूतक प्रातः 8:58 बजे से आरंभ होगा। जिसके चलते सभी मंदिर के कपाट बंद हो जाएंगे।
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ग्रहण सूतक
धर्म शास्त्र के अनुसार चंद्र ग्रहण में 9 घंटा पूर्व (पहले) ग्रहण का सूतक लग जाता है। इसमें बालक,वृद्ध और रोगी को छोड़ कर अन्य लोगों के लिए भोजन निषेध है। शास्त्रीय वचन के अनुसार भोजन निवृत्ति के साथ - साथ धार्मिक कृत्य श्राद्ध,दान आदि भी करना चाहिए। ग्रहण में जपा गया मंत्र सिद्धिप्रद होता है। ग्रहण काल में, दीर्घशंका, लघुशंका, भोजन व पूजा नहीं करना चाहिए। बालक, वृद्धि, रोगी, व गर्भवती स्त्री के लिए यह निषेध नहीं माना गया है। ग्रहण काल में ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। घर में रखे अनाज या खाने की कच्ची वस्तु में दूर्वा या तुलसी या कुश डाल देना चाहिए। ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
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