कथा के दौरान वनवास और सीता हरण प्रसंग पर बोलते हुए जगद्गुरु ने कहा कि जीवन में आने वाले संकट मनुष्य की परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में धैर्य, सत्य और धर्म का मार्ग ही सही दिशा दिखाता है। उन्होंने कहा कि रावण का अंत उसके अहंकार के कारण हुआ, जबकि श्रीराम ने सदैव विनम्रता और न्याय का मार्ग अपनाया।
हनुमान जी की भक्ति का उल्लेख करते हुए जगद्गुरु संपत कुमाराचार्य ने कहा कि सच्ची भक्ति सेवा भाव से जुड़ी होती है। हनुमान जी ने अपने सामर्थ्य का उपयोग प्रभु श्रीराम की सेवा में किया, जिससे वे भक्तों के लिए प्रेरणा बन गए। उन्होंने कहा कि भक्ति के साथ-साथ कर्तव्य का पालन ही मानव जीवन को सार्थक बनाता है।
रामराज्य की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ ऐसी व्यवस्था से है, जहां न्याय, समानता और सदाचार हो। उन्होंने कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण में सुधार लाना होगा।
राम कथा के दौरान भजन-कीर्तन होते रहे, जिससे श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजन समिति ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।