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UP News: 'धर्म और मर्यादा सिखाते हैं राम...', नाै दिनी कथा में बोले संपतकुमाराचार्य; भक्तों का लगा जमावड़ा

Thu, 29 Jan 2026 08:31 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

Ballia News: इस कथा के आयोजक संतोष पहलवान का संपतकुमाराचार्य ने धन्यवाद किया। कहा कि जब तक ऐसे भक्त रहेंगे तब तक सनातन धर्म सुरक्षित रहेगा। इस भक्त ने बैनर पर तन-मन से सहयोग की अपील की थी। कोई रसीद या चंदा नहीं लिया गया था।
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जगद्गुरु स्वामी संपतकुमाराचार्य। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बैरिया के वार्ड नंबर 3 स्थित जगदेवा गांव में 9 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। इसमें काशी के सामनेघाट स्थित श्रीवैष्णम मठ के पीठासीन अधिकारी जगद्गुरु स्वामी संपतकुमाराचार्य ने रामकथा सुनाकर भक्तों को विभोर कर दिया। गुप्त नवरात्रि के अवसर पर नवचंडी कथा भी सुनाई गई।

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जिले के बैरिया क्षेत्र में आयोजित राम कथा के दौरान काशी के जगद्गुरु संपत कुमाराचार्य ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से धर्म, मर्यादा और कर्तव्य का संदेश दिया। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रवचन के दौरान पूरा वातावरण राममय हो गया।

जगद्गुरु संपत कुमाराचार्य ने श्रीराम जन्म प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति और मर्यादा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। माता-पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए वनगमन स्वीकार करना उनके त्याग और अनुशासन का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवा पीढ़ी को श्रीराम के आदर्शों से सीख लेनी चाहिए।

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भक्तों का हुआ जुटान

कथा के दौरान वनवास और सीता हरण प्रसंग पर बोलते हुए जगद्गुरु ने कहा कि जीवन में आने वाले संकट मनुष्य की परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में धैर्य, सत्य और धर्म का मार्ग ही सही दिशा दिखाता है। उन्होंने कहा कि रावण का अंत उसके अहंकार के कारण हुआ, जबकि श्रीराम ने सदैव विनम्रता और न्याय का मार्ग अपनाया।

हनुमान जी की भक्ति का उल्लेख करते हुए जगद्गुरु संपत कुमाराचार्य ने कहा कि सच्ची भक्ति सेवा भाव से जुड़ी होती है। हनुमान जी ने अपने सामर्थ्य का उपयोग प्रभु श्रीराम की सेवा में किया, जिससे वे भक्तों के लिए प्रेरणा बन गए। उन्होंने कहा कि भक्ति के साथ-साथ कर्तव्य का पालन ही मानव जीवन को सार्थक बनाता है।

रामराज्य की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ ऐसी व्यवस्था से है, जहां न्याय, समानता और सदाचार हो। उन्होंने कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण में सुधार लाना होगा।

राम कथा के दौरान भजन-कीर्तन होते रहे, जिससे श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजन समिति ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।
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