नगर के टाउन हाल बापू भवन में आयोजित कार्यक्रम का संबोधित करते प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभ
बलिया। भारत के समृद्ध इतिहास में भगवान बिरसा मुंडा का नाम एक ऐसे वीर योद्धा और समाज-सुधारक के रूप में अंकित है, जिन्होंने अपने जीवन को जनजातीय समाज की उन्नति और उनके अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया।
उनकी जयंती पर भारत में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल उनकी शहादत और योगदान को याद करने का है, बल्कि यह जनजातीय समुदाय की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, अनवरत संघर्ष और स्वाभिमान का उत्सव भी है। उक्त बातें उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने विरसा मुंडा की जयंती पर टाउन हॉल में शुक्रवार को गोष्ठी में कहीं। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा जी का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड में हुआ था। सामाजिक असमानता, अत्याचार और विदेशी शासकों द्वारा जनजातियों पर निरंतर हो रहे शोषण ने बिरसा मुंडा के अंतर्मन को विद्रोह की भावना से भर दिया।
जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा ने कहा कि बिरसा मुंडा ने उलगुलान नामक जनजातीय विद्रोह का नेतृत्व किया, जो अंग्रेजी शासन व अत्याचार के खिलाफ था। इस मौके पर संयोजक सुरेंद्र सिंह, सत्येंद्र गोंड, मुन्ना खरवार, मुनजी, संजय खरवार, प्रमोद खरवार, मुन्ना गोंड़, दीपक खरवार आदि मौजूद थे।