बलिया। भले ही आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत केंद्र सरकार ने गांवों में रोजगार के अवसर मुुहैया कराने की मंशा से आर्थिक पैकेज दिया है लेकिन उद्यम के लिए ऋण लेना आसान नहीं है। जिनकी पहुंच होती है, उनका ऋण पास हो जाता है लेकिन जिनके पास सिफारिश और पहुंच नहीं है, उनकी फाइलें लौटा दी जाती हैं। ऐसे तीन आवेदन सामने आए हैं जिनकी फाइलें उद्योग विभाग से पास हो गई लेकिन संबंधित बैंकों ने बिना कारण बताए लौटा दिया। ऐसे कई पीडि़त हैं जो लोन के लिए बैंकों का चक्कर लगाने के बाद हार गए और ऋण लेने का प्रयास ही छोड़ दिया। ऐसे में प्रवासियों के सामने काम शुरू करने के लिए ऋण लेना किसी चुनौती से कम नहीं है।
हालांकि सरकार का पूरा फोकस लघु उद्योगों के माध्यम से गांव में प्रवासी कामगारों को रोजगार मुहैया कराने पर है। इसके लिए एमएसएमई योजना के तहत लघु व कुटीर उद्योग को विस्तारित करने की कार्य योजना पर कार्य किया जा रहा है, लेकिन बैंकों की मनमानी और असहयोग की भावना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को आगे नहीं बढ़ने दे रही है। विशुनपुरा निवासी अजय कुमार ने बताया कि एक वर्ष पहले ऋण के लिए आवेदन किया था, उनकी पत्रावली प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत जिला उद्योग प्रोत्साहन व उद्यमिता विकास विभाग द्वारा स्वीकृत होकर बैंक गई। बैंक ने बिना कोई समुचित कारण बताये फाइल वापस कर दी। इसी प्रकार निधरिया के संजय कुमार के जाली-जंगला उद्योग, श्रीगणपति की मिल्क प्रोडेक्ट, राजेन्द्र नगर निवासी रिंकू कुमार के लिए ऋण का आवेदन किया था लेकिन बैंक ने फाइल लौटा दी। इसके अलावा कई युवा हैं जो एमएसएमई के तहत उद्यम लगाने के इच्छुक तो हैं, लेकिन बैंकों की मनमानी का शिकार होकर बेरोजगार हैं।
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जिले में लघु व कुटीर उद्योगों के विकास में संवादहीनता भी बाधक है। उद्यमी बैंकों के सामने अपना प्रेजेंटेशन ठीक ढंग से नहीं रख पाते हैं। इसके साथ ही बैंकों के इर्द-गिर्द मंडरा रहे बिचौलिए भी नये उद्योग शुरू होने में आड़े आ रहे हैं। जिले में लघु व कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत बैंकों से वापस लौटने वाली फाइलों को पुनर्विचार कर ऋण स्वीकृत करने के लिए भेजा जा रहा है।
-राजीव पाठक, उपायुक्त, जिला उद्योग प्रोत्साहन व उद्यमिता विकास केंद्र