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साइकिल से आजमगढ़ से बिहार गए मजदूर,रास्ते में खरीदी साइकिल, कई जगह लोगों ने कराया भोजन

Wed, 06 May 2020 09:45 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
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corona virus lockdown - फोटो : अमर उजाला
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आजमगढ़ में एक ठेकेदार के यहां कंस्ट्रक्शन का काम करने वाले एक दर्जन मजदूर आजमगढ़ से साइकिल से कटिहार अपने घर के लिए निकल गए। दो दिन पहले निकले मजदूरों को बैरिया चिरइया मोड़ के पास बुधवार को कुछ लोगो ने खाना खिलाया जिसके बाद वे लोग अपनी साइकिल लेकर आगे की सफर पर चल दिए।

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साइकिल से निकले महबूब आलम, मु. सकूर, मु. जलाऊ, महबूब आलम, सकील आलम ने बताया कि लॉकडाउन के बाद ठेकेदार ने हालचाल भी नहीं पूछा। मकान मालिक घर से बाहर निकाल दिया। जब तक हमारे पास पैसे थे तब तक आजमगढ़ में रहे, जब पैसे खत्म हो गए तो हमलोग वहां से पैदल ही कटिहार के लिए निकल गए। 50 किलोमीटर पैदल चलने के बाद रात को रास्ते में ही एक स्कूल पर रुक गए। वहां से घर वाले लोंगो को पूरी बात बताई। घर वालों ने खाते में पैसा भेजा तो दुकान से साइकिल खरीदकर घर को निकले। बताया कि हम सभी लोग एक सप्ताह के भीतर साइकिल से कटिहार पहुंच जाएंगे।

उधर, दया छपरा के अनुसार आजमगढ़ से साइकिल से ही एनएच 31 के दयाछपरा ढाला के रास्ते गए। ग्रामीणों ने भूखे मजदूरों को केला खिलाया। बिहार प्रांत के कटिहार निवासी मोहम्मद वसीम, अकबर, इब्राहिम, नजूल, मजारुल हक, परवेज आलम आदि ने बताया कि जो पैसा बचा था वो समाप्त हो गया इसके चलते ही हम लोगों को घर जाना पड़ रहा है। बताया कि रास्ते में कोई खिलाने वाला भी नहीं मिला यहां भोजन का आग्रह किए तो लोगों ने केला खिलाया जिससे कुछ राहत मिली।

गोलगप्पा बेचने वाले पैदल निकले घर जाने को

लॉकडाउन में धंधा ठप पड़ने के कारण नगर में घूम घूम कर गोलगप्पा बेचने वाले जालौन जनपद के उरई कोच निवासी 16 महिला, पुरुष एवं बच्चों का समूह आर्थिक किल्लत से तंग आकर मंगलवार को अपने गांवों को पैदल ही रवाना हुआ। बताया जाता है कि जालौन जनपद के विभिन्न गांवों के लोग नगर में किराए पर रहकर नगर तथा आसपास के गांवों में गोलगप्पा बेचने का काम करते थे। इसमें के अरविंद सिंह ने बताया कि लॉकडाउन शुरू होने के बाद कुछ दिनों तक जमा पैसे को खर्च कर अपना जीवन बिता लिया लेकिन अंत में स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई।

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कुछ दिनों तक थाना के द्वारा हमें राशन मुहैया कराया गया लेकिन राशन के अलावा भी कई ऐसी चीजें थी जिनके लिए हमें पैसे की सख्त जरूरत महसूस होने लगी। शासन प्रशासन तथा स्थानीय नेताओं से भी प्रयास किया कि हमें अपने गांव भेजने की व्यवस्था की जाए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके चलते हमने निर्णय किया कि यहां से पैदल हम जिला मुख्यालय तक जाएंगे और वहां से कोई व्यवस्था करके अपने घर पहुंचने की कोशिश करेंगे। इसमें रामप्रकाश, सुंदर, अरविंद, उमा, नंदिनी, पूजा आदि आदि रहे।

आजमगढ़ व हरियाणा से मजदूरों का पलायन जारी

जिले के सभी पड़ोसी जिलों की सीमाएं सील की गई हैं इसके बावजूद आजमगढ़ एवं हरियाणा से मजदूरों का साईकिल से घरों को जाने का सिलसिला जारी है। यही नहीं गंगा नदी का रास्ता सील होने के बावजूद नदी के उस पार से लोगों की आवाजाही जारी है। आजमगढ़ में काम कर रहे दिहाड़ी मजदूर मंगलवार को साइकिल से चलकर बुधवार की सुबह रामगढ़ पहुंचे। बिहार के कटिहार निवासी सिद्दीक अली, सईदूर मुहम्मद, असरफ अली, इदरिक अली, साजिद अली, मुहम्मद कादिर, इरशाद अहमद के अलावा दरभंगा निवासी दिनेश, सत्येंद्र, रणजीत, पवन व संजीत लॉकडाउन की अवधि समाप्त न होने व रोजी रोजी के अभाव में साइकिल से अपने घर को गए।

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