स्वतंत्रता आंदोलन में जिले के खास विद्रोही तेवरों के कारण इसे ‘बागी बलिया’ के नाम से जाना जाता है। देश को आजाद कराने में क्रांति की चिंगारी इस धरती से ही उठी थी। शहीद मंगल पांडेय से लेकर राजनीति के पुरोधाओं में शामिल जयप्रकाश नारायण, चंद्रशेखर, जनेश्वर मिश्र जैसी हस्तियां बलिया की धरती से ही जुड़ी रही हैं। कभी यहां कांग्रेस का दबदबा रहा तो कभी समाजवादी विचारधारा के नेताओं का वर्चस्व रहा। 2012 में जनपद की सात विधानसभा सीटों में से पांच सीटों पर सपा के विधायक काबिज हुए।
इसमें से तीन नारद राय, जियाउद्दीन रिजवी तथा रामगोविंद चौधरी प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। इसके अलावा चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर यूपी से सपा से राज्यसभा सांसद और अंबिका चौधरी सपा (अब बसपा) से एमएलसी चुने गए थे। इन तमाम दिग्गजों के बावजूद 2014 के लोकसभा चुनाव में बलिया लोकसभा सीट से भरत सिंह और सलेमपुर से रविंद्र कुशवाहा ने जीत हासिल कर भगवा लहराया था। अब 2017 में 17वीं विधानसभा चुनाव में भाजपा और सपा के अलावा बसपा के कद्दावर नेता जीत का दम भर रहे हैं। जनपद की सात विधानसभा सीटों पर मुद्दे चाहे जो हो, नतीजे को हमेशा जातिगत समीकरण और वोटों का बंटवारा ही तय करता है।