एसटीएस अधिकारियों ने बताया कि सीताराम ने 2012 में साथियों के साथ बलिया के सहतवार थाना क्षेत्र के गांव अतरडरिया के प्रधान मुसाफिर चौहान की पत्नी फूलमति की हत्या की थी। प्रधान की भी हत्या की योजना थी, लेकिन वह भाग गया था। ग्राम प्रधान पर मुखबिर होने का संदेह था। वारदात को अंजाम देने में सीताराम की प्रमुख भूमिका थी। इस मुकदमे में सीताराम की गिरफ्तारी के लिए आजमगढ़ डीआईजी ने 50000 का पुरस्कार घोषित किया गया था।
2023 में 15 अगस्त को सीताराम टीम के प्रमुख सदस्यों तारा देवी, लल्लू राम, सत्य प्रकाश वर्मा, राम मूरति, विनोद साहनी के साथ मीटिंग कर रहा था। मीटिंग में इसके साथियों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के कब्जे से नक्सल विचारधारा को आगे बढ़ाने संबंधी पत्रिकाएं और असलहे मिले थे। उस समय सीताराम भाग निकला था।
लखनऊ एटीएस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसकी विवेचना एनआईए कर रही है। उत्तर प्रदेश में दर्ज प्राथमिकी के अलावा बिहार के मुजफ्फरपुर, बांका सीतामढ़ी में भी बैंक डकैती, हत्या, मारपीट, अवैध असलहा रखने जैसे प्राथमिकी दर्ज हैं, जिनमें यह फरार चल रहा था। पूछताछ में सामने आए संगठन के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी अभियान जारी रहेगा।