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कटान पीडि़तों का शुरू हुआ पलायन

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रामगढ़ क्षेत्र के केहरपुर गांव में गंगा के कटान नजदीक होने से अपने आशियाने को तोड़ते मजदूर। - फोटो : BALLIA
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रामगढ़। गंगा के लगातार बढ़ रहे जलस्तर को लेकर कटान पीड़ितों ने पलायन शुरू कर दिया है। तटवर्ती गांव अवशेष बचे चौबे छपरा, केहरपुर, गोपालपुर, उदई छपरा के घरों पर हथौड़ा चलना शुरू हो गया ह। उधर, गंगा के उग्र रूप से ग्रामीण और किसान दहशत में हैं।
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केंद्रीय जल आयोग गायघाट गेज के अनुसार, सोमवार को दोपहर 12 बजे गंगा का जलस्तर 51.97 मी. दर्ज किया गया। साथ ही आधा सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ाव का क्रम जारी हैं। सामान लेकर सुरक्षित एनएच-31 पर ले जाने के लिए भी रास्ता नहीं है। क्योंकि गंगा नदी के साथ- साथ लगातार हो रही बारिश ने मुश्किलें और बढ़ा दी है।
रामगढ़ : पिछले 29 दिनों से चल रहा कटान निरोधक कार्य में कभी किसान की मांग तो कभी बारिश रोड़ा बनकर आ रही है। इसके चलते बाढ़ पीड़ितों में खलबली मची हुई है। सोनारटोला (रामगढ़) के कटान पीड़ितों का कहना है कि हम लोगों के बचाव के नाम पर बाढ़ विभाग अपनी झोली भर रहा है। ठेकेदारों द्वारा नदी में जैसे-तैसे बोल्डर डालकर छोड़ दिए गए जो आज गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से दिखाई भी नहीं दे रहा है। गंगापुर व सोनारटोला में जमकर बाढ़ विभाग और ठेकेदारों द्वारा कटानरोधी कार्य में मानक की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। विभाग द्वारा 50 फीसदी भी काम पूरा नहीं किया गया है।
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कुछ दिनों पहले बाढ़ निरोधक कार्य को देखने आए जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने कार्य स्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया था लेकिन वह खराब पड़ा है।
बीएसटी बांध छूने को बेताब है सरयू
जयप्रकाशनगर। क्षेत्र में सरयू नदी भी रौद्र रुप दिखाने लगी है। बकुल्हा संसार टोला बन्धे को सुरक्षित करने के लिए बने टी स्पर पर से करीब एक किमी दूरी पर अपना रौद्र रूप दिखाते हुए शनिवार की शाम को तेज हवा व बारिश के बीच चांददियर पंचायत के विद्यार्थी ब्रम्ह बाबा स्थान के समीप दो एकड़ कृषि भूमि सरयू में विलीन हो गई। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि वीरेंद्र यादव ने बताया यिक यह पंचायत हमेशा से उपेक्षा का शिकार रहा है। क्षेत्र के ध्रुप सिंह, हरेंद्र यादव, विनोद यादव, सूचित गोंड़ आदि की मानें तो मांझी घाट से लगायत सिताब दियारा तक करीब दो हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि को सरयू में समाहित हो गई है।
घाघरा के जलस्तर में होने लगी वृद्घि
बेल्थरारोड। पिछले कई दिनों से रुक-रुक कर हो रही बरसात से घाघरा नदी के जलस्तर में धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है। जलस्तर में वृद्धि से तटवर्ती दर्जनों ग्रामों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सहम गए हैं। इस बीच तटवर्ती क्षेत्रों में कटान का खतरा मंडराने लगा है। नदी का पानी गांव की ओर जाने लगा है।
हाहानाला से चैनपुर गुलौरा, टगुनिया, मठिया आदि क्षेत्रों में नदी का पानी फैल गया है। टीएस बंधे के निकट पानी पहुंच गया है। कटान की आशंका को लेकर तटवर्ती लोग भयभीत हैं। टीएस बंधे और नदी के बीच चैनपुर गुलौरा के तीन किलोमीटर के क्षेत्रफल में पांच कटान निरोधी ठोकर का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। ऐसे में जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी रहने से हर साल की तरह इस बार भी कृषि योग्य भूमि के नदी की जलधारा में समाहित होने की संभावना बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि नदी के उस पार देवरिया जिले में बरहज के पास बने ठोकर से टकराने के बाद नदी की जलधारा सीधे मुड़ते हुए इस पार बलिया जिले के क्षेत्रों से टकराती हैं, जिससे कटान होती है। कटान को रोकने के लिए चैनपुर गुलौरा में बन रहे कटानरोधी ठोकर का निर्माण 30 जून 2019 तक पूर्ण हो जाना चाहिए था, लेकिन विभागीय उदासीनता और ठेकेदार की लापरवाही से ठोकर निर्माण अधर में लटका हुआ है। इससे लोगों को कटान का दंश झेलना पड़ेगा। इसको लेकर लोगों में नाराजगी है।

चाँददीयर के विद्यार्थी ब्रम्ह बाबा स्थान के सामने सरयू नदी का कटान बीएसटी बंधे के तरफ बढ़ता हुआ।- फोटो : BALLIA

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