जिले के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले नब्बे फीसदी से अधिक बच्चे जमीन पर बैठकर ही पढ़ते हैं। कुछ ही विद्यालयों में डेस्क बेंच की व्यवस्था है। इसके पीछे विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन बच्चों को बैठने के लिए डेस्क-बेंच के नाम पर फूटी कौड़ी भी मुहैया नहीं कराता।
लेकिन मंगलवार को हाईकोर्ट द्वारा बच्चों को बेंच-डेस्क उपलब्ध कराने के निर्देश से उम्मीद जगी है कि अब निजी विद्यालय की तरह ही परिषदीय विद्यालयों के बच्चे भी बेंच-डेस्क पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करेंगे। इससे जिले के करीब 3 लाख बच्चों को फायदा मिलेगा। जिले के करीब 2500 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं।
इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सरकार प्रति वर्ष लाखों रुपये खर्च करती है। इन तमाम खर्चों के बाद भी बच्चे बिना डेस्क बेंच के पढ़ने को विवश हैं। ठंड हो या गर्मी उन्हें जमीन पर ही बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। जिले में कुछ उच्च प्राथमिक विद्यालयों में डेस्क बेंच की व्यवस्था है लेकिन प्राथमिक विद्यालयों में स्थिति ना के बराबर है। प्राथमिक विद्यालयों में जमीन पर बैठकर बच्चों के पढ़ने मामले को विगत दिनों हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था तथा प्रदेश सरकार से व्यवस्था करने का निर्देश दिया था।
विभागीय सूत्रों की माने तो कहीं-कहीं आम लोगों और शिक्षकों के सहयोग से वह भी जूनियर हाईस्कूल में बच्चों को बैठने के लिए डेस्क-बेंच की व्यवस्था की गई है। लेकिन एक याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट द्वारा शासन से बच्चों को डेस्क-बेंच की व्यवस्था करने के निर्देश के बाद उम्मीद जगी है कि अब शासन डेस्क-बेंच के लिए भी बजट जारी करेगा।
जिससे जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को बैठने के लिए डेस्क-बेंच की व्यवस्था हो सकेगी। उधर, हाईकोर्ट के इस आदेश का बच्चों के अभिभावकों ने भी सराहना की है। अभिभावक पंकज कुमार, रंजीत, कमलेश, श्रीराम का कहना है कि अब उन्हें उम्मीद जगी है कि निजी विद्यालयों की तरह ही परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले उनके बच्चे भी डेस्क-बेंच पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।