बलिया। नाग पंचमी का त्योहार सोमवार को है। इस दिन अद्भुत संयोग बन रहा है। सावन के तीसरे सोमवार के साथ ही नागपंचमी मनाया जाएगा। भक्त भगवान शिवशंकर व नाग देवता की पूजा एक साथ करेंगे।
इसको लेकर घर-घर तैयारी रविवार को ही शुरू हो गई। महिलाएं घरों के अंदर साफ-सफाई के साथ ही पूजन व्यवस्था में लगी रहीं। नाग पंचमी का पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन नागदेव की पूजा कर उन्हें दूध पिलाने से काफी पुण्य अर्जित होता है। आचार्य पं. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि सावन के पवित्र माह के सोमवार का दिन वैसे भी भगवान शिव का है। इसी दिन नाग पंचमी होना संयोग की बात है। विधि विधान से पूजा-अर्चन करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं, सारी मनोकामनाएं पूर्ण हाेती हैं। यह विशेष फलदायी होगा।
इस तिथि को नाग देवता को दूध लावा चढ़ाने के साथ शाम को विधि विधान से भगवान शिव और देवी गौरी की स्तुति करनी चाहिए। नाग पंचमी को लेकर गांवों में अखाड़े भी तैयार हो गए है। इस दिन कबड्डी, कुश्त में युवा अपनी जोर आजमाइश करते हैं। बताया कि सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला नागपंचमी का त्योहार 17 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन
रवि योग, शुभ योग और शुक्ल योग का महासंयोग भी बन रहा है। इस दिन नाग पूजा करने से काल सर्प दोष का नकारात्मक प्रभाव में कमी, घर के वास्तु दोष की समाप्ति और भविष्य में शत्रु और सर्पदंश का भय समाप्त होता है। पूजन कार्य संभव नहीं होने पर नागों की मानस पूजा कर सकते हैं तथा नागपूजा का भाव लाते हुए सुमिरन करते है तो पूजन का ही पुण्यफल प्राप्त
होता है । नाग पंचमी की तिथि पर मुख्य रूप से आठ नाग देवताओं की पूजा का विधान है।इन अष्टनागों के नाम है: वासुकि, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय है।