बलिया। जिले में अब युवा अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में रुचि दिखाने लगे हैं। थाईलैंड, मलेशिया, सऊदी अरब आदि खाड़ी देशों में यात्रा करने के साथ ही नौकरी के लिए बनवा रहे हैं। अभी तक एक भी महिला ने अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनवाया है। विदेश यात्रा की योजना बनाने वाले लोग भी इसमें शामिल है। वहीं, अधिकांश युवा विदेश में जाकर वाहन चालक आदि की नौकरी भी करते हैं। धीरे-धीरे इनकी संख्या अब बढ़ती जा रही है। तीन साल में परिवहन विभाग की तरफ से 34 अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस जारी हुए हैं। परिवहन विभाग के अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल में 153 देश साझेदार हैं। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अपने देश से अंतरराष्ट्रीय वैधता वाला ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकता है। यह एक वर्ष के लिए जारी किया जाता है।
इस तरह बनता है अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस
अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए एक साल का एक हजार रुपये का शुल्क जमा करना पड़ता है। इसके लिए आवेदक को राष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और निवास प्रमाण पत्र जमा करना होता है। वीजा और पासपोर्ट साइज फोटो लगाई जाती है। इसके बाद एआरटीओ के स्तर से जारी किया जाता है।
पुराने पर जारी होता है अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस
अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस परिवहन विभाग की तरफ से पुराने लाइसेंस पर ही जारी होते हैं। इसके लिए आवेदनकर्ता को वीजा व पासपोर्ट जमा करना पड़ता है। जिले में वाहन चलाने के लिए प्रशिक्षण निजी संस्थानों से लिया जाता है। उसके बाद डीएल बनाने की प्रक्रिया होती है।
अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन आते हैं। कागजात पूरे होने के बाद जारी किए जाते हैं। सउदी अरब व अमेरिका के लिए भी जारी हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कम आवेदन आते हैं। मलयेशिया, सउदी अरब और ब्रिटेन जैसे देशों में इन लाइसेंसों की सर्वाधिक मांग है। ऐसे लोगों को परमिट दिया जाता है, जिनके पास पहले से वैध ड्राइविंग लाइसेंस होता है। -अरुण राय, आरटीओ प्रशासन