बलिया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 1.52 लाख रुपये फसल क्षतिपूर्ति, पांच हजार रुपये मानसिक संताप और पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया है।
आग में जलकर बर्बाद हुई गेहूं की फसल का बीमा क्लेम रोकना एग्रीकल्चर इन्श्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड को भारी पड़ा। आदेश की तिथि से दो माह के भीतर भुगतान नहीं करने पर पूरी रकम पर नौ प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग का फैसला 11 सितंबर को सुनाया गया।
जवही दीयर निवासी दयानंद चौबे ने बड़ौदा यूपी बैंक की हल्दी शाखा से केसीसी ऋण लिया था। बैंक की सलाह पर उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत गेहूं की फसल का बीमा कराया था। इसके लिए 31 दिसंबर 2020 को उनके खाते से 798 रुपये प्रीमियम काटा गया था।
13 अप्रैल 2021 को अन्य किसानों की फसल के साथ उनकी करीब आठ बीघा गेहूं की फसल भी आग की चपेट में आकर जल गई। तहसीलदार के आदेश पर लेखपाल ने मौके पर क्षति का आकलन करते हुए 1.52 लाख रुपये का नुकसान बताया। इसके बावजूद बीमा क्लेम का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद किसान ने बैंक प्रबंधक, बीमा कंपनी और जिला कृषि अधिकारी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि आग अज्ञात कारणों से लगी थी और योजना के तहत केवल बिजली गिरने से लगी प्राकृतिक आग ही बीमित थी। तहसीलदार ने भी क्षतिपूर्ति की संस्तुति की थी।
ऐसे में केवल आग का कारण अज्ञात होने के आधार पर बीमा क्लेम रोकना उचित नहीं है। आयोग ने बॉम्बे हाईकोर्ट की जनहित याचिका संख्या 91/2021 में दिए आदेश का भी हवाला दिया, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने पांच सितंबर 2022 को पुष्ट किया था।
आयोग की अध्यक्ष रामचन्द्र तथा सदस्य दिनेश कुमार गुप्ता और सुषमा पाण्डेय की पीठ ने परिवाद केवल बीमा कंपनी के विरुद्ध साबित माना। बैंक की ओर से कहा गया कि उसकी जिम्मेदारी केवल प्रीमियम बीमा कंपनी तक भेजने की थी। वहीं जिला कृषि अधिकारी न तो आयोग के समक्ष उपस्थित हुए और न ही जवाब दाखिल किया, जिसके चलते उनके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई हुई।