जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पिछले 24 घंटे में 130 मरीज गंभीर हालत में पहुंचे। चिकित्सक ने 93 मरीजों को भर्ती कर लिया। इसमें 13 मरीज उल्टी दस्त के थे। आठ मरीज बाढ़ क्षेत्र के रहे।
दुबहड़ गांव निवासी अशोक कुमार ने कहा कि नदी का जलस्तर कम तो हो गया है लेकिन बाढ़ के बाद जलभराव से मच्छजनित व संक्रमण बीमारी से गांव के अधिकतर लोग चपेटे में हैं।
सर्दी, जुकाम, खांसी के अलावा उल्टी दस्त की परेशानी हो रही है। सीएचसी पर रात में इलाज की सुविधा नहीं मिलने से जिला अस्पताल आना पड़ता है। सागरपाली निवासी सुरेंन्द्र कुमार ने कहा कि बाढ़ व बरसात के पानी के जलभराव से संक्रमण बीमारियों ने पांव पसार लिया है।
जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी-पीएचसी प्रति रोज पांच हजार से अधिक मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंच रहे हैं। बाढ़ क्षेत्रों में दवा का छिड़काव व निगरानी न होने के कारण उल्टी दस्त व टायफाइड के लक्षण के मरीज आ रहे हैं। सोमवार को जिला अस्पताल में 1483 मरीज ओपीडी में पहुंचे। पैथाेलॉजी में 385 से ज्यादा मरीजों की जांच हुई। कई मरीजों की जांच रिपोर्ट में डायफाइड के लक्षण मिले।
बाल रोग फिजिशियन की ओपीडी में 163 व स्कीन रोग ओपीडी में 92 मरीज पहुंचे। फिजीशियन डॉ. पंकज झा ने बताया कि बरसात के मौसम व बाढ़ के बाद लोगों को मच्छरजनित व संक्रमण बीमारियों से बचाव जरूरी है। बालरोग विशेषज्ञ डाॅ. एके उपाध्याय ने बताया की खानपान में संयम बरत कर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
बच्चे को साफ पानी का सेवन कराए व मच्छरदानी में सुलाएं। सीएमएस डॉक्टर एसके यादव ने बताया कि मौसम के बदलाव के कारण मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। अस्पताल में प्रर्याप्त दवा व जांच की सुविधा मौजूद है।