प्राचीन काल में भारत ज्ञान का अतुल भंडार था। वेद, उपनिषद, पुराण आदि जैसे महाग्रंथ थे। कभी भारत पूरे विश्व का गुरु था। दुनिया को भारत सभ्यता व संस्कृति का पाठ पढ़ाता था।
किंतु शक्ति बिखरने के कारण भारत गुलाम हो गया। उक्त बातें मंगलवार को नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर जीराबस्ती में आयोजित कथा प्रसंग में मानस मर्मज्ञ अतुल कृष्ण भारद्वाज ने अपने प्रवचन के दौरान कहीं।
मानस मर्मज्ञ भारद्वाज ने कहा कि गुलाम भारत कई वर्षों तक विदेशी संस्कृति का दंश झेलता रहा। कहा कि बुद्धि से पहले बल की जरूरत है। बलशाली रहेंगे तभी आप की बुद्धि ज्ञान की बातें दुनिया सुनेगी।
आपकी हर बात विश्व के लोग मानने के लिए विवश हो। उन्होंने छात्रों से कहा कि हनुमान जी को गुरु मानकर बल-बुद्धि और विद्या का निरंतर अभ्यास कर उत्तरोतर विकास करना चाहिए।
उन्होंने अपने पूरे ओजस्वी संबोधन में लव-कुश, ध्रुव, प्रहलाद आदि के चरित्र का सुंदर चित्रण किया। उन्होंने छात्रों से ऐसा ही बनने का आह्वान किया।
प्रधानाचार्य ज्ञानेंद्र पांडेय ने मानस मर्मज्ञ के आगमन पर धन्यवाद देते हुए कहा कि शक्ति के बिना शिव भी शव है। इसलिए पहले शक्तिशाली बने। इस मौके पर डा. विनोद सिंह, विभाग प्रचारक सुरजीत, सरोज पांडेय, अखिलेश्वर आदि उपस्थित रहे।