बलिया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया।
सपा जिला कार्यालय से जुलूस निकालकर कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा गया। लोकसभा सदस्य रामशंकर विद्यार्थी राजभर ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन व्यवस्था जरूरी है। मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना आयोग की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक ने कहा कि देश को टीएन शेषन जैसे चुनाव आयुक्त की जरूरत है, जिन्होंने निर्वाचन आयोग को दुनिया में नई पहचान दिलाई। आयोग को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए। पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का मत सर्वोपरि है। निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा हर लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिकता होनी चाहिए।
पूर्व मंत्री जियाउद्दीन रिजवी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विधायक जयप्रकाश अंचल ने कहा कि मतदाता सूची से लेकर मतदान तक हर प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। सपा जिलाध्यक्ष सुनील कुमार मौर्य ने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर विपक्षी दलों के समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण करना चाहिए।
नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शन में पूर्व विधायक सुधीर राय, सच्चिदानंद तिवारी,मनोज गौतम, संजय उपाध्याय, ओमप्रकाश तिवारी, अशोक सिंह, बृजेश सिंह गाट, जैनेंद्र पांडेय मिंटू, शैलेश सिंह आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे। संचालन बीरबल राम ने किया।
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निरस्त हो बिहार और बंगाल का चुनाव: लक्ष्मण
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शन में भाकपा (माले) भी शामिल रही। इस दौरान माले नेता लक्ष्मण यादव ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदाता सूची में एसआईआर के नाम पर वोट चोरी करवा कर यह सिद्ध कर दिया कि वे लोकतंत्र को नहीं बल्कि भाजपा को मजबूत बनाना चाह रहे हैं। कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा एसआईआर के नियमों व शर्तों को ही नियमविरुद्ध बनाया गया और बिहार और बंगाल जैसे राज्य में चुनाव कराया गया और लाखों मतदाताओं को मतदाता सूची में लंबित रखा गया, ऐसे में बिहार और बंगाल का चुनाव निरस्त होना चाहिए।