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Ballia News: कफ सिरप पर रोक के बाद बढ़ी निगरानी

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बलिया। मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड व अन्य राज्यों में कफ सिरप के सेवन से मासूमों की मौत पर शासन के निर्देश पर कफ सिरप की बिक्री पर अंकुश लगा है। औषधि प्रशासन ने सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को श्रीसन फार्मा के कफ सिरप की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
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जिला अस्पताल सहित सीएचसी पीएचसी पर पिछले चार वर्षों से कफ सिरप की आपूर्ति नहीं हुई है। मेडिकल कारपोरेशन से ही दवा आपूर्ति होती है। कुछ दवाएं लोकल परचेज होती हैं, लेकिन उनमें भी कफ सिरप शामिल नहीं है। वहीं, बाल रोग विशेषज्ञ समेत अन्य डॉक्टरों को बीमार बच्चों के परिजन के अनुरोध पर कफ सिरप का परामर्श न देने के लिए कहा गया है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके उपाध्याय के मुताबिक छह माह तक के बच्चों को सिरप देना जरूरी नहीं। इसके बजाय उन्हें स्टीम (भाप) और सलाइन देना चाहिए। ताकि बंद नाक खुले और भरपूर सांस मिले। डॉ. उपाध्याय ने बताया कि सिरप का उपयोग फेफड़े का संक्रमण, बंद नाक यानी जुकाम और एलर्जी ठीक करने के लिए दिया जाता है। हालांकि, गुणवत्तापूर्ण यानी मानक के अनुसार साल्ट होने पर साइड इफेक्ट की आशंका नहीं होती। साल्ट के अंतर से दिक्कत होती है। बीमारी होने पर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाएं। डॉक्टर की ओर से जो भी दवाएं लिखी जाएं, उसे खरीदने के बाद एक बार फिर दिखा लें। उनकी ओर से चेक कर लिया जाए और जो मात्रा बताई जाए, उतना ही सेवन करें।
पर्ची को दरकिनार कर मांगते हैं सस्ती दवा

बलिया ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद सिंह ने बताया कि जिले में कफ सिरप का कारोबार दस लाख रुपये से अधिक का है। ज्यादातर डॉक्टर सिरप नहीं लिखते। सिरप की मांग दिसंबर, जनवरी, फरवरी में होती है। लेकिन इस बार बरसात व बाढ़ के कारण संक्रमण बढ़ने से सर्दी जुकाम के अलावा खांसी की समस्या बढ़ गई है। मरीज डॉक्टर के लिखे पर्चे को दरकिनार कर सस्ती दवा की मांग करते हैं। बाजार में महंगे ब्रांड की दवा की हूबहू स्थानीय कंपनी की दवा कम दाम पर बेची जाती है।
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50 प्रतिशत तक का मुनाफा
जिला अस्पताल स्थित एक मेडिकल शॉप संचालक ने बताया कि मौजूदा समय में बाजार में 100 से अधिक कंपनियों के कफ सिरप बिक रहे हैं। किसी का दाम 100 रुपये से कम नहीं है। डिमांड कीजिए, माल पहुंच जाता है, बिक्री करके रुपये देना होता है। उसमें भी 50 प्रतिशत तक मुनाफा है। देने के बाद अगर सही हो गया तो ठीक है, नहीं तो ग्राहक दोबारा आता है और बेहतर कहते हुए दूसरा दे दिया जाता है। फिलहाल, जिस ब्रांड की दवा पर रोक है, वह मार्केट में न के बराबर है।
शासन के निर्देश पर सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को प्रतिबंधित सिरप की बिक्री पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया गया है। जिले में सिरप की सप्लाई नहीं होती है। एहतियातन निगरानी की जा रही है। सिद्धेश्वर शुक्ल, औषधि निरीक्षक बलिया।
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