दिल्ली के वसंत विहार में जिले की बिटिया के साथ कल 16 दिसंबर क ी ही तारीख को दो वर्ष पहले 2012 में दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी थी। उस घटना को याद करके बिटिया के गांव का हर कोई सिहर उठता है।
दरिंदगी की शिकार बिटिया के बाबा के चेहरे पर गुस्सा और आंखों में आंसू है। उनका कहना है कि बिटिया की याद, उसकी शहादत की याद के बहाने क्षेत्र के विकास की उम्मीदें बंधी थीं। बिटिया की तेरही में जब मुख्यमंत्री श्रद्धांजलि देने आए थे तो भी ऐसा ही लग रहा था।
पर अब समय के साथ सारी उम्मीदें खत्म होती जा रही हैं। वादे के मुताबिक क्षेत्र में न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना और ना ही कोई ट्रेन चली। घर तक सड़क तो बनी लेकिन ऐसी घटिया कि टूटने लगी है।
बिटिया के बाबा ने कहा कि सरकार ने विकास के नाम पर जख्म देने का काम किया है। गांव में उसके नाम पर विकास के सभी काम अधूरे पड़े हैं।
बिटिया की तेरहवीं पर 11 जनवरी, 2013 को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आए थे और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की घोषणा की थी। परिवार के लोगों से मिलकर उनके आंसू पोंछे थे। गांव को विकास से जोड़ने की बात कही।
तब देश आंदोलित था तो नेता विकास की गंगा बहाने की बात कह रहे थे लेकिन आज सब भूल चुके हैं। बिटिया के बाबा कहते हैं कि शासन-प्रशासन की लापरवाही से अस्पताल मूर्त रूप नहीं ले सका है। यदि शासन-प्रशासन में बैठे लोग विवादित जमीन की जगह साफ-सुथरी जमीन का चयन करते तो आज बिटिया के नाम पर
अधूरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बन चुका होता।