जिले के अधिकांश होटल और अस्पताल में अचानक आग लगने के बाद उससे निबटने के लिए कोई माकूल व्यवस्था नहीं की गई है। यहां तक की कई निजी बड़े अस्पतालों ने अभी एनजीटी लेना भी मुनासिब नहीं समझा। सबसे दिलचस्प यह है कि जिला अस्पताल के नए भवन को बने हुए 13 साल बीत गए। लेकिन आज तक इसका एनओसी नहीं लिया गया। इन स्थानों पर खुदा न खास्ता कोई अप्रिय घटना घट गई तो मंजर बहुत ही खौफनाक होगा।
लखनऊ के सबसे बड़े अस्पताल में घटना के बाद एक बार फिर से प्रशासन की लापरवाही उजागार होने लगी है। अगिभनशमन विभाग की संवेदनहीनता के कारण अधिकतर शापिंग माल, अस्पतालों, स्कूलों तथा निजी होटल एनओसी विहीन है। आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो नगर में करीब आठ बड़े होटल है। जिनमें सिर्फ दो ही एनओसी के लिए आवदेन किया है। जबकि बाकी के होटल विभागीय रहमोकरम पर चल रहा है। यही हाल जिले के तमाम निजी चिकित्सालय तथा विद्यालयों का है। करीब 100 से उपर निजी चिकित्सालय तथा बहुमंजिली स्कूल है। जिनमें अगिभनशमन विभाग के मानकों के अनुरूप सीढ़ियां तथा अगिभनशमन यंत्र नहीं लगाए गए हैं।
यही नहीं दिलचस्प तो यह है कि जिला अस्पताल का नया भवन बने करीब 13 साल हो गए। लेकिन उसकी एनओसी आज तक नहीं ली गई। ऐसे में जिला अस्पताल या अन्य बहुमंजिली अस्पतालों में भीषण आग लगने के बाद अफरा-तफरी का माहौल कायम होना लाजिमी है। इस पर कभी भी अगिभनशमन महकमे के अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। जबकि कईबार इस तरह की घटनाएं जिले में हो चुकी है।