शरीर के रेस्पिरेटरी सिस्टम पर पड़ता है असर
कचरा जैसे-जैसे पुराना होता है, वैसे-वैसे खतरनाक बनता जाता है। पहले तो इससे सिर्फ कार्बन डाईऑक्साइड जैसी गैस बड़ी मात्रा में निकलने लगती है। इसका सीधा असर रेस्पिरेटरी सिस्टम पर होता है और इनफेक्शन का खतरा रहता है। कुछ दिन बाद इससे मिथेन गैस बनने लगती है, जो काफी खतरनाक होती है। कुछ दिन बाद तो कूड़ा गल कर हवा को जहरीला कर देता है। यह सांस के जरिए शरीर में पहुंच कर नुकसान पहुचाता है। - डॉ बीपी सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल, बलिया।
कचरा निस्तारण केंद्र के विवादित होने से कुछ समस्या उत्पन्न हुई है। हालांकि इसके समाधान के तौर पर डोर टू डोर कचरा कलेक्शन कराया जा रहा है और उसे शासन द्वारा निर्देशित पद्धति के आधार पर निस्तारित कराया जा रहा है। कचरा निस्तारण केंद्र का मामला हल होते ही यह समस्या समाप्त हो जाएगी। - दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, बलिया।
अधिकांश स्थानों पर नहीं है डंपिंग ग्राउंड
जिले में दो नगर पालिका और दस नगर पंचायतें है, जिनमें अधिकांश जगहों पर डंपिंग ग्राउंड का अभाव है। जिस कारण जैसे तैसे कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। चितबड़ागांव नगर पंचायत भी डंपिंग ग्राउंड नहीं है। चेयरमैन केसरी नंदन त्रिपाठी ने बताया कि डंपिंग ग्राउंड के लिए जमीन मिलने वाली है। नवगठित नगरा नगर पंचायत भी डंपिग ग्राउंड के बगैर संचालित हो रहा है। कूड़े को सड़क के किनारे गिराया जा रहा है। नवसृजित नगर पंचायत रतसड़ कलां में डंपिंग ग्राउंड के लिए अबतक कोई भूमि आरक्षित नहीं है। कस्बा में चार गड़हियां है जिसके किनारे लोग अपना कूड़ा स्वयं डालते है या सड़क पर ही छोड़ देते है। नगर पंचायत रेवती, बैरिया और नगर पालिका रसड़ा में कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था निकाय प्रशासन द्वारा की गई है।