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चरित्र निर्माण में विश्वविद्यलयों की अहम भूमिका: प्रो.कल्पलता

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बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के पंडित दीनदयाल शोधपीठ द्वारा वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में विश्वविद्यालयों की भूमिका विषय पर रविवार को एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें युवाओं के चरित्र निर्माण में विश्वविद्यालयों के योगदान विषय पर प्रो. आद्या प्रसाद पांडेय, पूर्व कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय मणिपुर ने विचार व्यक्त किए। कहा कि छात्रों में उदारता, सहृदयता, साहस, निष्ठा, सरलता आदि गुण एक शिक्षक अपने व्यक्तित्व के जरिये सीख सकता है।
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प्रो. सुरेखा डंगवाल, कुलपति, दून विश्वविद्यालय ने कहा कि कोविड के दौर में दुनिया के विश्वविद्यालय तेजी से बदल रहे हैं, यह हमारे लिए एक चुनौती है। प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, पूर्व कुलपति, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली गुरु-शिष्य शिक्षा प्रणाली का विकल्प नहीं हो सकती। हमारे विश्वविद्यालयों के पास संसाधन सीमित हैं। प्रो. हरेश प्रताप सिंह, सदस्य, उप्र लोक सेवा आयोग ने कहा कि वर्तमान में कई विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जो साधन संपन्न हैं। ये ऑनलाइन पढ़ाई, परीक्षा और मूल्यांकन करा सकते हैं। परंतु अधिकांश विश्वविद्यालय ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय ने कहा कि युवाओं के चरित्र निर्माण में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पूर्व की शिक्षा नीतियों में चरित्र-निर्णय की उपेक्षा की गई थी, जबकि नई शिक्षा नीति में इस पर विशेष बल दिया। संगोष्ठी का संचालन डॉ. रामकृष्ण उपाध्याय, संयोजक दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ, स्वागत डॉ. प्रमोद शंकर पांडेय एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जैनेंद्र पांडेय ने किया। इस अवसर पर प्रो. जेपीएन पांडेय, प्रो. डीके मदान, प्रो. जसवीर सिंह, प्रो. प्रवीण, डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी, डॉ. गणेश पाठक, डॉ. साहेब दुबे आदि उपस्थित रहे।
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