बलिया। जनपद में शून्य से लेकर पांच साल तक के बच्चों को समय-समय पर विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए जाते हैं। इनमें बीसीजी, डीपीटी, पोलियो और खसरे के अलावा कई अन्य टीके शामिल हैं। कोरोनाकाल में टीकाकरण अभियान पर असर पड़ा है। इसका नतीजा रहा है कि शत प्रतिशत के बजाय 49 फीसदी ही टीका लग पाया है। हालांकि टीकाकरण जनपद में बंद नहीं हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करे तो जनपद में अप्रैल, मई और जून में शून्य से एक वर्ष के 11721 बच्चों को टीकाकरण करने का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष मात्र करीब 12 फीसदी ही टीकाकरण किया जा सका है। इसी प्रकार एक से दो वर्ष के बच्चों करीब 11 फीसदी तथा दो से पांच वर्ष के करीब आठ फीसदी ही टीके लग पाए हैं। इसका मुख्य कारण एएनएम और आशा बहुओं का कोरोना टीकाकरण केंद्र पर तैनात करना बताया जा रहा है। कोरोना टीकाकरण में चार दिन तथा दो दिन अन्य टीकाकरण में तैनात रहना है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में शून्य से एक वर्ष तक के कुल 11721 बच्चे का लक्ष्य टीका लगाने का था। इसमें बीसीजी के 12.39, ओपीवी-वन 12.87, पेंटावेेलेंट-वन 12.95, ओपीवी-थ्री 12.67, पेंटावेलेंट-थ्री 12.84, एमआर-वन 12.81, जेई-वन 12.66 फीसदी लगाया गया। वहीं एक से दो वर्षे के जेई द्वितीय 11 फीसदी, एमआर द्वितीय 1.63, डीपीटी प्रथू बूस्टर 11.86 फीसदी लगाई है। दो से पांच वर्ष के डीपीटी द्वितीय बूस्टर 7.72 फीसदी टीकाकरण किया गया है। इस प्रकार, कुल 25 प्रतिशत में मात्र करीब 12 फीसदी ही टीका लग सका है। इसका मुख्य कारण कोरोना में एएनएम और आशाओं की ड्यूटी लगना बताया जा रहा है।
कोट
कोरोना महामारी में बच्चों की टीकाकरण बंद नहीं हुआ है लेकिन अभियान जरूर प्रभावित हुआ है। अगर कोरोनाकाल में एएनएम की ड्यूटी नहीं लगी होती तो करीब 70 फीसदी टीकाकरण हो चुका रहता। - डा. प्रेमप्रकाश, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी