सहतवार। घाघरा का जलस्तर बढ़ने से टीएस बंधे के समीपवर्ती गांवों के बांशिदों के माथे पर चिंता की लकीरें खींचना शुरू हो गया है। चार दशकों से बाढ़ की विभीषिका का दंश झेल रहा बंधा अब बेहद कमजोर हो चुका है। विगत दिनों हुई बरसात की वजह से बंधे पर जगह-जगह गड्ढा बन गया है। उधर, चूहे एवं साहिलों द्वारा मान खोदकर बंधे को और जर्जर कर दिया गया है। बंधे के दोनों तरफ झाड़-झंखाड़ व खर पतवार उग गए है। इसकी वजह से अन्य जानवरों ने भी मांद बना लिया है।
इसके अलावा घाघरा नदी के लहरों के कारण बंधा धीरे-धीरे कटकर काफी पतला हो गया है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में बाढ़ के पानी के दबाव के कारण यह बंधा टूट सकता है। तटवर्ती बांशिदों का कहना है कि बंधे पर संबंधित विभाग द्वारा कोई कार्य नहीं कराया गया है। विभागीय अधिकारी चैन की नींद सो रहे है। उनकी तंद्रा तब टूटेगी, जब गांव तबाही के पथ पर होगा।