गंगा यात्रा समापन के मौके पर सती घाट फेंका गया प्लास्टिक के बोतल।
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लालगंज। जिले के लोगों को गंगा की सफाई का महत्व समझाने के लिए दो अक्टूबर को जिला प्रशासन की ओर से तीन दिवसीय गंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान गंगा के किनारे स्थित अलग-अलग गांवों में कार्यक्रम आदि का आयोजन कर उन्हें साफ-सफाई को लेकर जागरूक किया गया। इसमें गंगा किनारे बसे सभी गांवों के प्रधानों को भी शामिल किया गया। इसी क्रम रविवार को भी जिले के सतीघाट पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के साथ ही जिले के बड़े अधिकारी भी शामिल हुए, लेकिन कार्यक्रम के बाद जाते समय वे गंगा किनारे स्वयं गंदगी फैलाकर चले गए। गंगा किनारे प्लास्टिक के बोतल व पन्नी का खुलेआम प्रयोग किया गया, जिसे वहां छोड़ दिया गया, जो हवा के झोंके गंगा में जाकर नदी को प्रदूषित कर रहे हैं।
जिले के पश्चिमी छोर से दो अक्तूबर को गंगा यात्रा निकाली गई थी। यात्रा के अंतिम दिन चार अक्तूबर को सती घाट पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के साथ ही जिले के सभी बड़े अधिकारी पहुंचे। सभी ने अपने भाषणों में गंगा को साफ सुथरा रखने का मंत्र दिया। इस दौरान गंगा सफाई को लेकर लोगों कई ज्ञान की बातें बताई गईं। फिर जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की आवभगत में जमकर प्लास्टिक की बोतल बंद पानी बांटा गया। पानी पीने के बाद लोगों ने बोतलों को गंगा किनारे ही फेंक दिया। वीआईपी मेहमानों को थर्माकोल की प्लेटों में नाश्ता कराया गया और बाद में प्लेटों को भी गंगा किनारे फेंक दिया गया।
कार्यक्रम की समाप्ति के बाद आयोजकों की तरफ से घाट पर सफाई भी नहीं कराई गई। थर्माकोल की प्लेटों और प्लास्टिक की बोतलों को वहीं गंगा किनारे छोड़ दिया गया, जो अब हवा के झोंके के साथ गंगा में समा रहे हैं। इसे लेकर अब क्षेत्र के लोग कह रहे हैं कि जो लोग गंगा की सफाई के लिए लाखों रुपये खर्च कर सकते हैं, क्या वें कुछ और रुपये खर्च कर सफाई नहीं करा सकते थे। लोगों ने कहा कि अधिकारियों व नेताओं के इसी रवैये के कारण गंगा वर्षों से साफ नहीं हो पा रही हैं।
कार्यक्रम स्थल पर सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। अभी तक वहां सफाई नहीं हुई इसकी जानकारी नहीं थी। यदि वहां सफाई नहीं हुई है तो जांच कर संबंधित सफाई कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अरविंद मौर्या, एडीओ पंचायत