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भोगवादी प्रवृत्ति से विनाश के कगार खड़ी हैं मानवता: डा. गणेश

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बलिया। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर अमर नाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा के पूर्व प्राचार्य एवं समग्र विकास शोध संस्थान के सचिव पर्यावरणविद् डॉ. गणेश कुमार पाठक ने कहा कि प्रकृति हमारी भोगवादी प्रवृत्ति एवं विलासितापूर्ण जीवन के कारण विनाश के कगार पर खड़ी है। इस विनष्ट होती प्रकृतिको बचाने में कहीं देर न हो जाए, अन्यथा पृथ्वी के संपूर्ण विनाश को रोकना किसी के बस की बात नहीं रह जायेगी।
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हमारी गतिविधियों के कारण वन क्षेत्र निर्जन, पहाड़ सपाट हो रहें हैं और नदियां सूखती जा रही हैं। जिसके चलते प्रकृति में असंतुलन की स्थिति उत्पन्न होती जा रही है। कोरोना ने विश्व की गतिविधियों को जिस तरह से रोक दिया है। उससे पर्यावरण के कारकों में काफी सुधारात्मक लक्षण देखने को मिल रहे हैं। इससे इस बात की तो पुष्टि हो ही जा रही है कि हम प्रकृति के कारकों से जितना ही कम छेड़ - छाड़ करेंगे, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। यदि भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो हमारी संस्कृति में ही माता भूमि: पुत्रोअहम्पृथ्विव्या की अवधारणा निहित है, जिसके तहत हम पृथ्वी को अपनी माता मानते हैं। कहा कि प्रकृति संरक्षण के लिए हमें अपनी आवश्यकताओं को भी कम करना होगा और भोगवादी प्रवृत्ति एवं विलासितापूर्ण जीवन का त्याग करना होगा।
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