बलिया। रसोई गैस, तेल, दाल हर चीज की कीमत लगातार बढ़ रही है। रसोई गैस की कीमत तो दो गुनेे से ज्यादा हो गई लेकिन स्कूलों में मध्याह्न भोजन के कर्न्वजन कास्ट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। ऐसे में मेन्यू के मुताबिक भोजन उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पा रहा है। तमाम स्कूलों में तो अब लकड़ी पर भी भोजन पकाया जाने लगा है।
जिले के 2250 परिषदीय विद्यालयों में करीब 3.25 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। वर्तमान में मिड-डे मील के तहत प्राथमिक विद्यालय में प्रति छात्र 4 रुपये 97 पैसे और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रति विद्यार्थी 7 रुपये 45 पैसे दिए जा रहे हैं। स्कूलों के मेन्यू में सब्जी-रोटी, मौसमी फल, तहरी व दूध आदि शामिल है। खाद्यान्न का तो कोटा निर्धारित है लेकिन दूसरी वस्तुएं इसी कन्वर्जन कास्ट से ही खरीदनी पड़ती हैं। पांच रुपये में दूध और फल देना मुश्किल है क्यों कि दूध 50 रुपये लीटर से कम नहीं है और केले जैसा फल भी 60 रुपये दर्जन मिलता है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में डेढ़ हजार बालिकाएं अध्ययनरत है। प्रति बालिका 60 रुपये दिए जा रहे हैं। इसी में दो बार मेन्यू के हिसाब से नाश्ता व भोजन दिया जाता है। एक शिक्षिका बताती हैं कि बीते पांच सालों से कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कनवर्जन कॉस्ट में बढ़ोत्तरी नहीं की गई जबकि चीजों के दाम दो गुने तक हो गए है।
वर्ष 2021 में कुछ पैसे की बढ़ोत्तरी मिड-डे मील में की गई थी। शासन से जो रेट तय हैं उसमें जिले स्तर से कुछ नहीं किया जा सकता। उसी के हिसाब से विद्यालयों में भोजन व्यवस्था को संचालित किया जा रहा है।-सुनील चौबे, प्रभारी बीएसए व खंड शिक्षा अधिकारी बांसडीह।
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